संभल। जिले में जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन के खिलाफ सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला दर्ज होने से हड़कंप मच गया है। प्रशासन का आरोप है कि ग्राम समाज की आरक्षित भूमि पर मस्जिद, मजार और मकान का निर्माण कर कब्जा किया गया, जबकि संबंधित जमीन सार्वजनिक उपयोग और वृक्षारोपण के लिए सुरक्षित थी।
हल्का लेखपाल मुकेश कुमार यादव की तहरीर पर संभल कोतवाली में दर्ज मुकदमे के अनुसार, गांव सैफखां सराय स्थित गाटा संख्या 452 की भूमि चकबंदी के दौरान सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित की गई थी। आरोप है कि वर्षों पहले खतौनी में दर्ज नामों को 27 जनवरी 2003 को तहसीलदार न्यायालय द्वारा निरस्त कर भूमि को पुनः ग्राम समाज के नाम दर्ज कर दिया गया था। इसके बावजूद कब्जा बरकरार रखा गया।
प्रशासन का यह भी दावा है कि कब्जे को वैध दिखाने के लिए वक्फ बोर्ड के समक्ष गलत तथ्यों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किया गया और भूमि का वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण करा लिया गया। लेखपाल ने अपनी शिकायत में कहा है कि आवेदन में यह तथ्य छिपाया गया कि जमीन सार्वजनिक संपत्ति है।
मामला पहले से ही राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। तहसीलदार न्यायालय सरकारी भूमि पर मस्जिद, मजार और मकान निर्माण को अवैध मानते हुए शाही इमाम और उनके भाई पर लगभग सात करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है। हालांकि इस आदेश के खिलाफ डीएम न्यायालय में अपील दायर की गई है, जिस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।
अब आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा। प्रशासन की इस कार्रवाई ने संभल में सरकारी भूमि और वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


