फर्रुखाबाद।माफिया और गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर पुलिस विभाग के भीतर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक गैंगस्टर और संगठित अपराध से जुड़े लोगों को कथित संरक्षण देने के आरोप में एक सिपाही समेत पूर्व कोतवाली प्रभारी पर जल्द बड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं वहीं रिश्वतखोरी का एक मामला भी प्रकाश में आया है रकम डकारने के बाद भी अपराधियों को संरक्षण देने में पीड़ितों का साथ दिया गया, दोनों पक्षियों से पैसा डकारा गया।
सूत्रों का दावा है कि कुछ समय से प्रशासन और खुफिया इकाइयों को ऐसे इनपुट मिल रहे थे कि जिले में सक्रिय माफिया तंत्र को अंदरूनी स्तर पर सहूलियत दी जा रही थी, साथी अपराधियों को पूर्व माफियाओं को कोतवाली में बैठाया जा रहा था। आरोप है कोतवाली के कि कुछ पुलिसकर्मी संवेदनशील सूचनाएं लीक करने, कार्रवाई की जानकारी पहले पहुंचाने और दबाव बनाकर मामलों को प्रभावित करने में भूमिका निभा रहे थे। इस मामले में सिपाही और इंस्पेक्टर नें कुख्यात अपराधी को अपने सजातीय लोगों के कहने से फरार करवाया था, इस बात की भनक अधिकारियों को हो गई थी।
बताया जा रहा है कि कई पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खंगाली जा रही हैं। कॉल डिटेल, संदिग्ध संपर्कों और कार्रवाई के दौरान बरती गई कथित लापरवाही की भी जांच हो रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ पुलिसकर्मियों की गतिविधियां लंबे समय से निगरानी में थीं और अब उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
चर्चा यह भी है कि पूर्व कोतवाली प्रभारी के कार्यकाल के दौरान कुछ चर्चित अपराधियों और गैंगस्टरों को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि उस समय मामलों को दबा दिया गया, क्योंकि एक बड़ा पुलिस अधिकारी आरोपी पुलिसकर्मियों का रहनुमा बन गया था।लेकिन अब शासन और प्रशासनिक सख्ती के बीच पुराने रिकॉर्ड और शिकायतों को फिर से निकाला जा रहा है।
जिले में माफिया नेटवर्क, अवैध कब्जों और संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच यह मामला और संवेदनशील माना जा रहा है। पुलिस विभाग के भीतर यह संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि अपराधियों से सांठगांठ रखने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से किसी अधिकारी या कर्मचारी का नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है, फिलहाल एक का निलंबन दूसरे प्रकरण मे हुआ है,लेकिन विभागीय गलियारों में इस संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होते ही निलंबन, विभागीय कार्रवाई और कानूनी शिकंजा एक साथ देखने को मिल सकता है।


