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Saturday, August 29, 2026

34 साल पुराने DTC केस में बस कंडक्टर को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने बहाली के दिए आदेश

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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 34 साल पुराने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के एक बर्खास्त बस कंडक्टर को राहत दी है। यह मामला महज 20 रुपये की कथित गड़बड़ी से जुड़ा था, जिसमें आरोप था कि कंडक्टर ने यात्रियों से पैसे लेने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया। इस घटना के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। मामला वर्षों तक विभिन्न अदालतों में चलता रहा और कंडक्टर को करीब 34 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अब हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उसकी सेवा बहाली का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने डीटीसी को निर्देश दिया है कि बस कंडक्टर को नौकरी पर बहाल किया जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंडक्टर की गलती को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी कारण कोर्ट ने आदेश दिया कि उसे बैक वेजेस (पिछला वेतन) का भुगतान नहीं किया जाएगा।

अदालत की पीठ ने माना कि बस कंडक्टर की पुनः बहाली का आदेश जांच प्रक्रिया में कुछ खामियों के कारण दिया जा रहा है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि 20 रुपये की गड़बड़ी हुई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी बस कंडक्टर की बनती है। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे नौकरी पर बहाल करने का आदेश तो दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसे इसकी “कीमत” चुकानी होगी। इसी कारण उसे बैक वेजेस (पिछले वेतन) का लाभ नहीं दिया जाएगा।

मामले में अदालत ने पाया कि जांच टीम ने कई अहम प्रक्रियात्मक कमियां की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उन यात्रियों को गवाह नहीं बनाया गया जिन्होंने कथित रूप से कंडक्टर को पैसे दिए थे। इसके अलावा, विवादित 20 रुपये की राशि भी कंडक्टर से बरामद नहीं की गई। इन्हीं कमियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि आरोप पूरी तरह संदेह से परे साबित नहीं हो पाए। इसी आधार पर कंडक्टर को संदेह का लाभ (benefit of doubt) दिया गया और उसे सेवा में बहाल करने का आदेश पारित किया गया।

मामले में कड़कड़डूमा स्थित श्रम न्यायालय और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने यह माना था कि बस कंडक्टर की ओर से कुछ अनियमितताएं हुई थीं। इसी आधार पर अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया कि कंडक्टर बैक वेजेस (बकाया वेतन) और वरिष्ठता जैसे लाभों का हकदार नहीं है। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया में खामियों और सीमित राहत को ध्यान में रखते हुए बहाली का आदेश दिया, लेकिन आर्थिक लाभ देने से इनकार किया गया।

जानकारी के अनुसार, आरोपी बस कंडक्टर 24 अप्रैल 1992 को बादशाहपुर रूट पर ड्यूटी पर था। उसी दौरान दिल्ली परिवहन निगम की निरीक्षण टीम ने बस को रोककर यात्रियों की टिकट जांच की। जांच में पाया गया कि बस में सवार 5 यात्रियों से कंडक्टर ने 2-2 रुपये लिए थे, लेकिन उन्हें टिकट जारी नहीं किया गया था। इसी तरह भोंडसी में हुए दूसरे निरीक्षण के दौरान भी 5 यात्रियों से 2-2 रुपये लेने के बावजूद टिकट नहीं दिए जाने की बात सामने आई। निरीक्षण टीम ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट विभाग को सौंपी, जिसके बाद दिल्ली परिवहन निगम ने कंडक्टर को सेवा से बर्खास्त कर दिया।

 

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