कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस पार्टी (Trinamool Congress Party) के नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के आवास पर कोलकाता पुलिस पहुंची है। इस समय अभिषेक के घर के बाहर भारी पुलिसबल तैनात है। अभिषेक बनर्जी के 188ए हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास पर सोमवार को पुलिस पहुंची। कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई कोलकाता नगर निगम की ओर से जारी किए गए एक नोटिस के बाद हुई है, लेकिन पुलिस के वहां पहुंचने का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
यह नोटिस अभिषेक बनर्जी के घर के कई हिस्सों में कथित तौर पर अवैध निर्माण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। दरअसल अभिषेक को इस मामले में सात दिनों का नोटिस दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, सात दिनों के समयसीमा की यह अवधि आज समाप्त हो गई है। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) अभिषेक बनर्जीके अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर स्वामित्व वाली या सह-स्वामित्व वाली कई प्रॉपर्टीज के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसके तहत उनके 17 प्रॉपर्टीज को लेकर नोटिस जारी किए गए थे।
इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने केएमसी को पत्र लिखकर अवैध निर्माणों के संबंध में नोटिस का जवाब देने के लिए समय मांगा था। इन नोटिसों की प्रतियां ऐसी प्रॉपर्टीज की दीवारों पर चिपका दी गई हैं। डायमंड हार्बर के सांसद के दो आवास, 188ए हरीश मुखर्जी रोड और दूसरा पास ही 121 कालीघाट रोड पर है और दोनों केएमसी की जांच के दायरे में हैं। हरीश मुखर्जी रोड स्थित प्रॉपर्टी के मामले में ‘लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक कॉर्पोरेट संस्था को नोटिस जारी किया गया है, जिसका स्वामित्व कथित तौर पर बनर्जी परिवार के पास है।
कालीघाट रोड स्थित प्रॉपर्टी के मामले में, नोटिस अभिषेक बनर्जी की मां लता बनर्जी को जारी किया गया है। दोनों प्रॉपर्टी कोलकाता में स्थित हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के काफी करीब हैं। बंगाल में जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार रही, विपक्षी दल सीपीएम, कांग्रेस और बीजेपी इस मुद्दे पर मुखर रही कि बनर्जी परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम पर बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड है।
हालांकि उस समय ममता बनर्जी ने इन आरोपों को विपक्षी दलों की ओर से कीचड़ उछालने की एक कवायद बताकर सिरे से खारिज कर दिया था। अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजे जाने को लेकर ममता बनर्जी ने कोलकाता के टीएमसी पार्षदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन 136 पार्षदों में से काफी कम संख्या में ही पार्षद पहुंचे थे।


