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Sunday, May 24, 2026

यूपी पंचायत चुनाव 2026 से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव

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पहली बार 57,654 ग्राम पंचायतों में प्रधान बनेंगे प्रशासक

सीएम योगी की भी यही मंशा, प्रधान आखिरी तक संभालें अपने अधिकार

यूथ इंडिया (शरद कटियार)

लखनऊ/फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सरकार ने बड़ी प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश की सभी 57,654 ग्राम पंचायतों में वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह पहली बार होगा जब ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधान स्वयं प्रशासक की भूमिका में काम करेंगे। इससे पहले यह जिम्मेदारी आमतौर पर एडीओ अथवा पंचायत प्रशासन को सौंपी जाती रही है।

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की भी यही मंशा है कि ग्राम प्रधान अपने अधिकारों और विकास कार्यों की जिम्मेदारी आखिरी समय तक संभाले रखें, ताकि गांवों में विकास योजनाओं की रफ्तार प्रभावित न हो।

प्रदेश सरकार पंचायत चुनावों को विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रही है। शासन स्तर पर यह माना जा रहा है कि पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत रखने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।

पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था तय करने के लिए राज्य सरकार पहले ही पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर चुकी है। आयोग को पंचायतों में ओबीसी आरक्षण के संबंध में सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव 2026 के अंत या फिर 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए सरकार अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था तैयार कर रही है।

अब तक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों का वित्तीय और प्रशासनिक नियंत्रण पंचायत विभाग या बीडीओ स्तर के अधिकारियों के पास चला जाता था। लेकिन इस बार भेजे गए प्रस्ताव में वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही उनकी पंचायत का प्रशासक बनाए जाने की सिफारिश की गई है।

यदि प्रस्ताव लागू होता है तो प्रदेशभर में करीब 57,654 ग्राम पंचायतों में 26 मई तक प्रशासकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे लाखों विकास कार्यों, पंचायत निधियों और ग्रामीण योजनाओं का संचालन सीधे प्रधानों के हाथ में बना रहेगा।

ग्रामीण राजनीति में ग्राम प्रधान सबसे मजबूत स्थानीय इकाई माने जाते हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव टलने की स्थिति में प्रधानों को प्रशासक बनाए रखना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे गांवों में सत्ता संतुलन और संगठनात्मक पकड़ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

प्रदेश में करीब 8 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधि विभिन्न स्तरों पर जुड़े हैं। इनमें ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं। पंचायत चुनाव का असर सीधे विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा पर पड़ता है, इसलिए सभी दल अभी से ग्रामीण समीकरण साधने में जुट गए हैं।

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