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Thursday, May 21, 2026

यूपी में भीषण गर्मी का कहर, कई जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात, दिन के साथ रातें भी बनीं ‘तंदूर’

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लखनऊ।इंडिया मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट की ताजा चेतावनी ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार 21 मई को प्रदेश के कई जिलों में बेहद खतरनाक लू चलने की आशंका है। हालात इतने गंभीर हो सकते हैं कि दोपहर में घर से बाहर निकलना लोगों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। इस बार केवल दिन ही नहीं, बल्कि रातों की गर्मी भी लोगों की परेशानी बढ़ाने वाली है।
मौसम विभाग ने बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत कई जिलों में अत्यधिक लू चलने की चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में सुबह से ही तेज धूप लोगों को झुलसाना शुरू कर सकती है, जबकि दोपहर तक गर्म हवाएं आग के थपेड़ों जैसी महसूस होंगी।
पूर्वांचल और मध्य यूपी के कई जिलों में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। प्रतापगढ़, सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव, रायबरेली, बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और कासगंज में भी भीषण गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूलभरी गर्म हवा लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है, जबकि पूर्वी जिलों में उमस और तपिश मिलकर स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
इस बार मौसम विभाग की सबसे बड़ी चिंता रात के तापमान को लेकर है। बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, बलिया, लखनऊ, कानपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, आगरा और झांसी समेत कई शहरों में रात के समय भी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है। आमतौर पर रात में तापमान गिरने से लोगों को कुछ राहत मिलती है, लेकिन इस बार रातें भी गर्म रहने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता तापमान बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकावट के मामलों में तेजी आने की आशंका है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर में अनावश्यक बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव करने की सलाह दी है।
प्रदेश में मई की यह गर्मी अब सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि जनजीवन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। अस्पतालों में गर्मी से प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है, जबकि बिजली और पानी की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है।

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