लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटके पंचायत चुनावों को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश Ram Autar Singh को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण और सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फार्मूले को लागू करने के उद्देश्य से काम करेगा। सरकार ने आयोग को छह महीने का कार्यकाल दिया है, हालांकि अधिसूचना में तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने का भी प्रावधान रखा गया है।
पांच सदस्यीय इस आयोग में अध्यक्ष के अलावा दो सेवानिवृत्त अपर जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। आयोग में पूर्व एडीजे Brijesh Kumar और Santosh Kumar Vishwakarma शामिल हैं। वहीं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों Arvind Kumar Chaurasia और S. P. Singh को भी सदस्य नामित किया गया है। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में बनाया गया है।
दरअसल 18 मई को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद बुधवार को आयोग के गठन की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। आयोग पंचायत क्षेत्रों का सर्वे कर आरक्षण का नया रोटेशन तय करेगा, जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव पहले ही विलंबित हो चुके हैं। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव के नतीजे 2 मई तक आ गए थे, लेकिन इस बार आरक्षण प्रक्रिया और कानूनी बाधाओं के चलते चुनाव कार्यक्रम तय नहीं हो सका। राज्य निर्वाचन आयोग अब 10 जून को अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तैयारी में है, हालांकि इसकी तारीख पहले पांच बार बढ़ाई जा चुकी है।
प्रदेश में ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। वहीं जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होगा। ऐसे में चुनाव समय पर नहीं होने की स्थिति में पंचायतों में प्रशासक या प्रशासक समितियां नियुक्त करनी पड़ सकती हैं। पंचायती राज विभाग ने शासन को निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने अथवा प्रशासक समिति गठित करने का प्रस्ताव भी भेज दिया है।


