लखनऊ। प्रदेश में मिशन 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आवास पर हुई अहम बैठक में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई टीम के गठन को लेकर व्यापक मंथन किया गया। बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी .एल संतोष , प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। दो चरणों में चली बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों, छह क्षेत्रीय अध्यक्षों और निगम, आयोग व बोर्डों में समायोजन के लिए संभावित नामों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद संगठन में भी बड़े बदलाव का खाका तैयार कर लिया है। प्रदेश में नए महामंत्री, उपाध्यक्ष और मंत्रियों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। पार्टी अब सात की जगह छह महामंत्री रखने की तैयारी में है। वर्तमान में प्रदेश इकाई में 45 सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली में संगठन का आकार सीमित रखने पर भी विचार हुआ। हालांकि यूपी इकाई ने राज्य के विशाल क्षेत्रफल और चुनावी वर्ष का हवाला देकर मौजूदा ढांचे को बरकरार रखने की पैरवी की।
बैठक में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर विशेष फोकस किया गया। पश्चिम क्षेत्र में गुर्जर और वैश्य चेहरे पर चर्चा हुई, जबकि अवध क्षेत्र में ब्राह्मण नेतृत्व को प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है। ब्रज क्षेत्र में शाक्य या लोध समाज से किसी नेता को जिम्मेदारी मिल सकती है। वाराणसी क्षेत्र के नामों पर अंतिम फैसला दिल्ली नेतृत्व की सहमति से होगा, वहीं गोरखपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राय को अहम माना जा रहा है। कानपुर क्षेत्र में भी जातीय समीकरण बदलने की चर्चा तेज है।
भाजपा संगठन ने निगम, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में समायोजन के लिए पहले चरण में 25 नामों पर विचार किया है। माना जा रहा है कि प्रदेश संगठन की घोषणा के बाद इन नियुक्तियों की सूची भी जारी की जाएगी। पार्टी पहले ही मार्च में प्रदेश के 761 नगरीय निकायों में 2805 सभासदों का समायोजन कर बड़ा संदेश दे चुकी है। इसके अलावा 98 संगठनात्मक जिलों में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की गई थी।
सूत्रों का कहना है कि इस बार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा। प्रदेश संगठन और विभिन्न बोर्डों में एक-तिहाई महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का दबाव पार्टी नेतृत्व पर बताया जा रहा है। दिल्ली में चली लंबी बैठकों के बाद अब भाजपा कार्यकर्ताओं और दावेदारों की निगाहें नई टीम की आधिकारिक घोषणा पर टिक गई हैं। चुनावी दृष्टि से इसे भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक कवायद माना जा रहा है।


