सीएम योगी के बयान के बाद ‘फोटो वसूली गैंग’ का खेल बिगड़ा
लखनऊ/फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने छोटे बच्चों से विद्यालय में सामान्य गतिविधियों को लेकर शिक्षकों को अनावश्यक प्रताड़ित न करने की बात कही, प्रदेश भर में तथाकथित “दलाल मीडिया” की बेचैनी बढ़ गई है। वर्षों से कुछ कथित पत्रकार और यूट्यूब संचालक स्कूलों में बच्चों की झाड़ू लगाते, पानी भरते या सफाई करते फोटो खींचकर शिक्षकों को ब्लैकमेल करने का खेल खेल रहे थे।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई अध्यापकों का आरोप रहा है कि स्कूल पहुंचते ही कुछ लोग बच्चों की सामान्य गतिविधियों को “बाल श्रम” और “शिक्षा व्यवस्था की विफलता” बताकर वीडियो बनाते थे, फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर मोटी वसूली करते थे। कई मामलों में शिक्षक बदनामी के डर से चुपचाप पैसे देने को मजबूर हो जाते थे।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब इस पूरे नेटवर्क की पोल खुलती दिखाई दे रही है। शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं बल्कि संस्कार का स्थान भी है, जहां बच्चे सामूहिक जिम्मेदारी और स्वच्छता सीखते हैं। लेकिन कुछ लोगों ने इसे भय और उगाही का जरिया बना दिया था।
शिक्षक संगठनों का मानना है कि वास्तविक पत्रकारिता का उद्देश्य व्यवस्था सुधारना होना चाहिए, न कि कैमरा दिखाकर ब्लैकमेलिंग करना। कई शिक्षकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों और दलाल मीडिया नेटवर्क की जांच कर कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने का धंधा बंद हो सके।
प्रदेश के शिक्षा जगत में अब यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री के बयान ने उन लोगों के आर्थिक हितों पर चोट पहुंचाई है, जो वर्षों से स्कूलों को “वसूली केंद्र” बनाकर घूम रहे थे।


