“छोटी-छोटी आदतें बदलें, भारत को आर्थिक और रणनीतिक ताकत बनाएं” — प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से बड़ा राष्ट्रीय आह्वान करते हुए आत्मनिर्भर और मजबूत भारत के निर्माण के लिए सात महत्वपूर्ण संकल्पों पर आगे बढ़ने की अपील की है। “राष्ट्र प्रथम, कर्तव्य सर्वोपरि” का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर लें तो भारत दुनिया की सबसे मजबूत आर्थिक और रणनीतिक शक्तियों में शामिल हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैर जरूरी विदेश यात्राओं से बचने, स्वदेशी उत्पाद अपनाने, खाद्य तेल की खपत सीमित करने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और सोना खरीदने से परहेज करने की अपील की।
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया ऊर्जा संकट, युद्ध जैसे हालात, बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती का असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार अब केवल सरकारी नीतियों के जरिए नहीं बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से भी आर्थिक मजबूती का मॉडल तैयार करने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार का मानना है कि यदि बड़े शहरों में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को आंशिक रूप से बढ़ावा मिला तो ईंधन की खपत में भारी कमी आ सकती है। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल पर दबाव कम होगा बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक जैसी समस्याओं में भी राहत मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने स्वदेशी अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उनका संदेश साफ था कि भारत को आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। खासकर खाद्य तेल, ऊर्जा और विदेशी उत्पादों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देना होगा। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील को भी कृषि लागत कम करने और स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री की “सोना खरीदने से परहेज” वाली अपील को लेकर हो रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया में सबसे अधिक सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर असर पड़ता है। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग निवेश के वैकल्पिक और उत्पादक साधनों की ओर बढ़ें।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि जब देश संकटों से गुजर रहा हो तो हर नागरिक का कर्तव्य केवल आलोचना करना नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा बनना भी होता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि जनता की भागीदारी से बनेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल आर्थिक अपील नहीं बल्कि राष्ट्रव्यापी जन-अभियान की शुरुआत माना जा सकता है। कोरोना काल में “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान की तरह अब सरकार आर्थिक अनुशासन और संसाधन बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
हालांकि विपक्ष इस अपील को लेकर सरकार पर सवाल भी उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि महंगाई, गिरते रुपये और आर्थिक दबाव के बीच जनता पहले ही परेशान है। लेकिन भाजपा और सरकार समर्थकों का तर्क है कि वैश्विक संकट के समय राष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक अनुशासन ही भारत को मजबूत बनाएगा।
देशभर में प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक “राष्ट्र प्रथम” का संदेश तेजी से ट्रेंड कर रहा है। आने वाले दिनों में यह अभियान आर्थिक राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता की नई बहस को और तेज कर सकता है।


