नई दिल्ली
पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में रविवार तड़के करीब 3:30 बजे एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरा इलाका चीख-पुकार से गूंज उठा। ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, तभी दूसरी मंजिल के पिछले हिस्से में अचानक आग भड़क उठी। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और एयर कंडीशनर (एसी) में विस्फोट को वजह माना जा रहा है। देखते ही देखते आग ने दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया और 9 लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बुझ गई।
इस दर्दनाक हादसे में सबसे अधिक नुकसान दूसरी मंजिल पर रहने वाले जैन परिवार को हुआ। यहां अरविंद जैन (60), उनकी पत्नी अनीता जैन (58), बेटा निशांत जैन (35), बहू आंचल जैन (33) और डेढ़ वर्षीय मासूम आकाश जैन जिंदा जल गए। पहली मंजिल पर शिखा जैन (45) पत्नी नवीन भी आग की चपेट में आकर दम तोड़ गईं। वहीं तीसरी मंजिल पर एक ही परिवार के नितिन जैन (50), उनकी पत्नी शैले जैन (48) और पुत्र सम्यक जैन (25) की भी दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में नवीन जैन (48) गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
आग लगते ही इमारत में अफरातफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए छत की ओर भागे, लेकिन दुर्भाग्यवश छत का दरवाजा बंद मिला। धुएं और लपटों के बीच कई लोग सीढ़ियों पर ही फंस गए और वहीं उनकी जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे लेकिन आग की भयावहता के आगे कोई कुछ नहीं कर सका। कुछ शव बिस्तर पर ही मिले, जिससे साफ है कि उन्हें उठने का भी मौका नहीं मिला।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत और बचाव अभियान के दौरान 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि कई लोग झुलस गए। हालांकि इमारत के पिछले हिस्से में फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल साबित हुआ।
हादसे के बाद शवों की स्थिति इतनी भयावह थी कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया। कई शव पूरी तरह जलकर कंकाल में तब्दील हो चुके हैं। सभी शवों को गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी अस्पताल) की मोर्चरी में भेजा गया है, जहां डीएनए सैंपलिंग के जरिए पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई है। अरविंद जैन के बेटे दीपक का डीएनए सैंपल भी लिया गया है।
मृतकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। अरविंद जैन के साले संजय जैन ने बताया कि परिवार करीब 10 साल पहले सीलमपुर के गौतमपुरी से यहां आकर बसा था। उन्होंने बताया कि शवों की हालत इतनी खराब है कि पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फायर सेफ्टी मानकों, इमरजेंसी एग्जिट और इमारत में लगे उपकरणों की जांच की जा रही है। छत का दरवाजा बंद होना इस हादसे में मौत का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है।
यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की भयावह कहानी बन गया है। अगर समय रहते सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता होते, तो शायद नौ जिंदगियां यूं न बुझतीं। अब सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कौन है और क्या इस दर्दनाक हादसे से सबक लिया जाएगा, या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह


