लखनऊ। उत्तर प्रदेश में करीब 15 साल बाद जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिसे इस बार तकनीकी रूप से अधिक आधुनिक और व्यापक बनाया गया है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि पहली बार नागरिकों को डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और डाटा संग्रह को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।
जनगणना निदेशालय के अनुसार, पहले चरण में 7 मई से 21 मई 2026 तक लोगों को स्वगणना के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इस दौरान नागरिक अपने मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से आधिकारिक पोर्टल पर जाकर परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से गणनाकर्मी घर-घर पहुंचकर इन जानकारियों का सत्यापन और मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) का कार्य करेंगे।
इस प्रक्रिया में लगभग 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षक भी शामिल हैं। प्रत्येक गणनाकर्मी को करीब 800 लोगों या 180–200 मकानों का डाटा जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा, जिससे डाटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगा।
पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो मुख्य रूप से मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, उपलब्ध सुविधाएं (जैसे पानी, बिजली, शौचालय, रसोई), परिवार के सदस्यों की संख्या, सामाजिक वर्ग और घरेलू संसाधनों से संबंधित होंगे। हालांकि, इस चरण में व्यक्तिगत और जातिगत गणना नहीं की जाएगी। यह कार्य दूसरे चरण में फरवरी 2027 के दौरान किया जाएगा।
नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति ने किसी स्थान पर कम से कम 180 दिन निवास किया है, उसकी गणना उसी स्थान पर की जाएगी। वहीं, एक ही रसोई से भोजन करने वाले लोगों को एक परिवार माना जाएगा। यदि एक ही घर में अलग-अलग रसोई हैं, तो उन्हें अलग-अलग परिवार के रूप में गिना जाएगा।
जनगणना निदेशालय की निदेशक ने नागरिकों से अपील की है कि वे सही और सटीक जानकारी दें, क्योंकि यह डाटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है और किसी भी परिस्थिति में साझा नहीं किया जाता। गलत जानकारी देने पर दंड का भी प्रावधान है।
गौरतलब है कि देश में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। वर्ष 2027 की जनगणना देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना न केवल जनसंख्या के आंकड़े प्रदान करेगी, बल्कि विकास योजनाओं, संसाधन वितरण और नीतिगत निर्णयों के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगी।


