एटा। जनपद एटा में भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी अरविंद सिंह के निर्देश पर जलेसर तहसील में तैनात चकबंदी लेखपाल हरिओम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जमीन की पैमाइश के नाम पर रिश्वत मांगने से जुड़े एक ऑडियो के इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है, जिससे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया।
मामला सामने आते ही जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी द्वारा लेखपाल को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बताया जा रहा है कि आरोपी लेखपाल पर किसानों से जमीन की पैमाइश कराने के बदले धनराशि मांगने का आरोप है। ऑडियो वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से अधिकारियों के संज्ञान में आया, जिसके बाद बिना देरी किए कार्रवाई की गई। अब पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, जिससे सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके और आगे की कार्रवाई तय हो सके।
इसी क्रम में जलेसर क्षेत्र से ही एक अन्य राजस्व कर्मचारी, माल बाबू से संबंधित ऑडियो वायरल होने की भी जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर उसका पटल परिवर्तन कर दिया गया है और उसके खिलाफ भी विस्तृत जांच कराई जा रही है। प्रशासन इस मामले को व्यापक स्तर पर देख रहा है, ताकि राजस्व विभाग में व्याप्त किसी भी प्रकार की अनियमितता को जड़ से खत्म किया जा सके।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जनपद में भ्रष्टाचार के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अवैध वसूली या अनियमितता में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से साफ संकेत गया है कि प्रशासन अब भ्रष्टाचार के मामलों में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आम जनता में भी प्रशासन की सख्ती को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। लोगों का मानना है कि इस तरह की त्वरित और कठोर कार्रवाई से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा।


