
प्रशांत कटियार
हम अक्सर ऐसे जीते हैं मानो हमारे पास अनंत समय हो—मानो हर अधूरा काम, हर टूटा रिश्ता, हर अनकहा शब्द कल पूरा कर लेंगे। लेकिन सच इससे बिल्कुल उलट है। जीवन की यात्रा लंबी नहीं, बल्कि बहुत छोटी है। इस छोटे से सफर को हम खुद ही जलन, ईर्ष्या, अपमान, क्रोध और द्वेष में उलझाकर भारी बना देते हैं। सवाल यह है कि क्या वाकई यह सब इतना जरूरी है?
हम रोज़ ऐसे छोटे-छोटे मुद्दों को दिल से लगा लेते हैं, जो कुछ दिनों बाद खुद ही बेमानी हो जाते हैं। किसी की बात चुभ गई, किसी का व्यवहार अच्छा नहीं लगा, किसी ने सम्मान नहीं दिया—और हम उन भावनाओं को अपने भीतर जमा करते रहते हैं। धीरे-धीरे यही बोझ हमारे भीतर की शांति को खा जाता है। जबकि सच यह है कि हर बात को दिल से लगाना जरूरी नहीं होता। कुछ बातों को माफ़ कर देना चाहिए, कुछ को नजरअंदाज़ कर देना चाहिए,और बाकी को समय पर छोड़ देना चाहिए।
जीवन का सबसे बड़ा सच अनिश्चितता है। कल क्या होगा, कोई नहीं जानता। कौन कब इस यात्रा से उतर जाएगा, इसका भी कोई भरोसा नहीं। हम जिन लोगों के साथ आज हैं, जरूरी नहीं कि वे हमेशा हमारे साथ रहें। ऐसे में क्या यह सही है कि हम अपने रिश्तों को अहंकार और गलतफहमियों में तोड़ दें? या फिर हमें उन्हें समझदारी, धैर्य और प्रेम से संभालना चाहिए?
हम अक्सर भविष्य की चिंता और अतीत की यादों में इतना उलझ जाते हैं कि वर्तमान को जीना भूल जाते हैं। जबकि असली जीवन तो इसी पल में है,यही वह समय है जब हम हंस सकते हैं, किसी को गले लगा सकते हैं, किसी का दिल जीत सकते हैं।
जीवन को बेहतर बनाने के लिए बड़े बदलावों की जरूरत नहीं होती। बस अपने नजरिए को बदलने की जरूरत होती है। अगर हम हर दिन को कृतज्ञता के साथ जिएं, छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करें, और अपने आसपास के लोगों को महत्व दें—तो यही जीवन अपने आप खूबसूरत बन जाता है।
रिश्ते इस सफर की सबसे बड़ी पूंजी हैं। पैसे, पद और प्रतिष्ठा समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन सच्चे रिश्ते ही अंत तक साथ निभाते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम उन्हें संजोकर रखें, उन्हें समय दें, और उनमें प्यार और सम्मान बनाए रखें।
आखिर में बात बहुत सीधी है,यह यात्रा बहुत छोटी है।
इसे शिकायतों में नहीं, मुस्कुराहटों में बिताइए।
इसे नफरत में नहीं, प्रेम में जिएं।
क्योंकि जब यह सफर खत्म होगा, तब हमारे पास न गुस्सा बचेगा, न अहंकार सिर्फ यादें बचेंगी।
और यह हम पर है कि वे यादें कड़वी हों या खूबसूरत।


