जनता को दिखने लगा विश्वास का असर
मैडम लाठर का फरमान,’ घटना के बाद ‘नहीं ‘घटना के पहले’ हों तत्पर
दूसरा फरमान, काम नहीं तो कुर्सी नहीं
तीसरा फरमान, सिस्टम से बाहर का दखल बर्दास्त नहीं
फर्रुखाबाद। जनपद में लंबे समय से सुस्त और शिकायतों से घिरे प्रशासनिक ढांचे को अब तेज़ रफ्तार और सख्त नेतृत्व मिल गया है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कार्यभार संभालने के बाद जिस अंदाज में व्यवस्था को पकड़ना शुरू किया है, उसने भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सीधा प्रहार किया है। अब प्रशासन “फाइलों” से निकलकर “मैदान” में उतर चुका है और इसका असर आम जनता तक साफ दिखाई देने लगा है।
जनपद में डीएम की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत है सीधी निगरानी और त्वरित कार्रवाई। हाल ही में कमालगंज स्थित गैस एजेंसी के औचक निरीक्षण में कई दिनों से लंबित गैस डिलीवरी पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई और जिम्मेदारों को तुरंत जवाबदेह बनाया। यह सिर्फ एक उदाहरण नहीं, बल्कि उस सख्त सिस्टम की झलक है जिसमें लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं हो रही।
सूत्रों के अनुसार, तहसील और ब्लॉक स्तर पर चल रही अनियमितताओं पर भी डीएम की पैनी नजर है। खासकर तहसील सदर में राजस्व कर्मियों द्वारा लगातार बढ़ती जा रहीं घोर लापरवाही और राजस्व विभाग में लंबित मामलों, जमीन विवादों और शिकायतों की लगातार समीक्षा की जा रही है। कई मामलों में अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर जनता की शिकायतों का समाधान समय से नहीं हुआ तो सीधी कार्रवाई तय है। यही वजह है कि वर्षों से लंबित फाइलें अब तेजी से निपटने लगी हैं।
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी डीएम ने स्पष्ट संदेश दिया है माफिया और अवैध गतिविधियों के लिए जनपद में कोई जगह नहीं। पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर अवैध खनन, भू-माफियाओं और कालाबाजारी पर शिकंजा कसने की रणनीति तैयार की गई है। सूत्र बताते हैं कि कई संदिग्ध मामलों की गोपनीय जांच भी शुरू कराई गई है, जिससे आने वाले दिनों में बड़े खुलासे संभव हैं।
विकास कार्यों की बात करें तो डीएम डॉ. लाठर केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं। सड़क, जल निकासी, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में जमीनी निरीक्षण बढ़ाए गए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी योजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा। कई जगहों पर घटिया निर्माण की शिकायतों पर जांच बैठाई गई है, जिससे ठेकेदारों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
आपदा प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन सक्रिय मोड में है। गर्मी और लू से बचाव के लिए गो-आश्रय स्थलों में कूलर, पानी और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत दी जा सके। यह तैयारी बताती है कि प्रशासन अब “घटना के बाद” नहीं, बल्कि “पहले से” काम कर रहा है।
युवाओं और रोजगार को लेकर भी पहल तेज हुई है। कौशल विकास, रोजगार मेलों और स्थानीय अवसरों को बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया गया है। प्रशासन का फोकस है कि जिले का युवा बाहर जाने को मजबूर न हो, बल्कि यहीं अवसर मिले।
सबसे अहम बात डीएम की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही साफ दिख रही है। जनसुनवाई को प्रभावी बनाया गया है, जहां शिकायतों का वास्तविक समाधान प्राथमिकता पर है। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि “काम नहीं तो कुर्सी नहीं”।
फर्रुखाबाद में प्रशासनिक ढांचे में जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह महज संयोग नहीं बल्कि सख्त नेतृत्व का परिणाम है। डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने यह साबित करना शुरू कर दिया है कि अगर नीयत साफ और इरादे मजबूत हों, तो सिस्टम बदलना असंभव नहीं। अब देखना होगा कि यह रफ्तार कितनी दूर तक जाती है लेकिन फिलहाल, जनता को एक “काम करने वाली डीएम” जरूर मिल गईं हैं ।


