– नाबालिग छात्रों की जान खतरे में अभिभावकों ने पुलिस से मांगी एफआईआर
लखनऊ: लखनऊ पब्लिक स्कूल में स्थित बॉयज़ हॉस्टल एक बार फिर हिंसा का अखाड़ा बन गया। 21 अप्रैल 2026 को हुई ताजा घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। अभिभावकों ने सीधे तौर पर कोतवाली चिनहट पुलिस से शिकायत करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता ने बच्चों की जान जोखिम में डाल दी है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले 6 महीनों में हॉस्टल के अंदर 4 से 5 बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया गया। इस बार मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विद्यालय प्रशासन पूरी तरह नियंत्रण खो चुका है।
21 अप्रैल की घटना में कई छात्रों के घायल होने की पुष्टि हुई है। अभिभावकों का आरोप है कि हॉस्टल वार्डन और स्टाफ पूरी तरह नाकाम रहे, उन्होंने न तो समय पर हस्तक्षेप किया और न ही किसी प्रकार की रोकथाम की कोशिश की। जबकि हॉस्टल परिसर में सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं, फिर भी न तो कोई अलर्ट जारी हुआ और न ही सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि घटना के बाद भी अभिभावकों को संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उल्टा, उन्हें खुद स्कूल प्रशासन के पीछे भागना पड़ा। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
अभिभावकों ने अपनी शिकायत में यह भी आशंका जताई है कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, जिससे सच्चाई दबाई जा सके। यही वजह है कि उन्होंने तत्काल फुटेज जब्त करने और फोरेंसिक जांच की मांग की है।
प्राथमिक जांच में छात्रों के बीच गंभीर मारपीट, आपराधिक धमकी और समूहिक हिंसा की बात सामने आई है। अभिभावकों नें पुलिस से केस दर्ज करने की मांग की है।
इसके साथ ही किशोर न्याय अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की मांग उठाई गई है, क्योंकि मामला नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़ा है। सवाल यह भी है कि अगर लगातार हिंसा हो रही थी, तो स्कूल प्रबंधन ने पहले कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया?
अभिभावकों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और न्यायालय की शरण लेंगे।


