कन्नौज। जिले में गेहूं उत्पादन के वास्तविक और वैज्ञानिक आंकड़ों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अब जमीन पर उतर चुका है। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने खुद खेत में पहुंचकर क्रॉप कटिंग करवाई और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। यह कार्रवाई गुगरापुर ब्लॉक के माछा गांव में की गई, जहां गेहूं की फसल का सटीक आकलन करने का प्रयास किया गया।
जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद कृषि विभाग के अधिकारियों से फसल की गुणवत्ता, प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता और पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार की स्थिति पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आंकड़ों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुमान आधारित रिपोर्टिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने कहा कि क्रॉप कटिंग का उद्देश्य सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर वास्तविक उत्पादन का आंकलन करना है। इससे न सिर्फ सरकारी खरीद और भंडारण नीति प्रभावित होती है, बल्कि किसानों को मिलने वाले मुआवजे, बीमा दावों और समर्थन मूल्य से जुड़े फैसलों में भी यही डेटा अहम भूमिका निभाता है।
सूत्रों के अनुसार, कई बार क्रॉप कटिंग के आंकड़ों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे या तो उत्पादन कम दिखाया जाता है या ज्यादा—दोनों ही स्थितियां किसानों और सरकार के लिए नुकसानदेह होती हैं। ऐसे में डीएम का खुद मौके पर पहुंचना प्रशासन की सख्ती का संकेत माना जा रहा है।
मौके पर राजस्व और कृषि विभाग की टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जाए और हर डेटा का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।
कन्नौज में यह पहल ऐसे समय पर हो रही है जब राज्य सरकार गेहूं खरीद को लेकर बड़े लक्ष्य निर्धारित कर चुकी है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर यह “वैज्ञानिक आंकलन” किसानों को वास्तविक लाभ दिला पाता है या फिर यह भी कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाएगा।
गेहूं उत्पादन का ‘वैज्ञानिक टेस्ट’: डीएम ने खेत में उतरकर की क्रॉप कटिंग


