नई दिल्ली
देश में चुनावी माहौल के बीच मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। तमिलनाडु में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘आतंकवादी’ से कर दी, जिसके बाद भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। इस बयान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों दल आमने-सामने आ गए हैं।
भाजपा ने इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी की ओर से भारतीय जनता पार्टी ने भारत निर्वाचन आयोग को औपचारिक शिकायत भेजते हुए कहा है कि यह बयान आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। भाजपा ने आयोग से मांग की है कि खरगे को न केवल सार्वजनिक माफी मांगने के निर्देश दिए जाएं, बल्कि उनके चुनावी प्रचार पर भी प्रतिबंध लगाने जैसे सख्त कदम उठाए जाएं।
मामले को और गंभीर बनाते हुए भाजपा ने कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। पार्टी ने अपने पत्र में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कहा है कि इस प्रकार के बयान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और मतदाताओं को भ्रमित कर सकते हैं। भाजपा चाहती है कि जांच कर उचित धाराओं में कार्रवाई की जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही भाजपा ने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया है कि इस विवादित बयान के प्रचार-प्रसार पर तुरंत रोक लगाई जाए। पार्टी का कहना है कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर इस बयान का प्रसार चुनावी माहौल को दूषित कर सकता है, इसलिए इसे हटाना जरूरी है।
विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है। खरगे के अनुसार, उनकी टिप्पणी का मकसद देश में बने ‘डर के माहौल’ को उजागर करना था, न कि व्यक्तिगत हमला करना।
फिलहाल यह मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है और अब सबकी निगाहें भारत निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि इस बयान पर क्या कार्रवाई की जाती है।


