10 से अधिक जनजातियों को प्राथमिकता सूची में शामिल कर सरकार ने बढ़ाई उम्मीदें
लखनऊ
प्रदेश सरकार ने ग्रामीण गरीबों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पात्रता में बड़ा विस्तार किया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने घोषणा की कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में निवासरत कई वंचित अनुसूचित जनजातियों को अब योजना की प्राथमिकता श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे हजारों परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की उम्मीद जगी है।
सरकार के इस फैसले के तहत भोंटिया, जौनसारी, राजी, गोंड सहित उसकी उपजातियां—धुरिया, ओझा, नायक, पठारी, राजगोंड, खरवार, खैरवार, पराहिया, पंखा, पनिका, अगरिया, पटारी, भुइंया और भुनिया जैसी जनजातियों को पात्रता सूची में शामिल किया गया है। इन समुदायों को अब सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे वे सरकारी आवास योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे के दौरान यह सामने आया था कि ये जातियां अब तक योजना से बाहर थीं, जबकि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। कई स्थानों पर इन समुदायों के लोगों ने आवास आवंटन की मांग भी उठाई थी। इसके बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विचार-विमर्श किया और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें योजना में शामिल करने का निर्णय लिया।
यह निर्णय खासतौर पर पूर्वांचल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों—महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, कुशीनगर, भदोही और संतकबीरनगर—में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए राहत भरा साबित होगा। इन इलाकों में इन जनजातियों की बड़ी आबादी निवास करती है, जो अब तक आवास योजना के लाभ से वंचित थी।
सरकार के इस कदम को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल कमजोर वर्गों को आवासीय सुरक्षा मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने और आर्थिक सशक्तिकरण को भी गति मिलेगी।


