एटा
जनपद में बच्चों को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष डीपीटी-टीडी टीकाकरण अभियान की शुरुआत कर दी गई है। यह अभियान 30 अप्रैल तक संचालित किया जाएगा, जिसमें हजारों बच्चों को उम्र के अनुसार टीके लगाए जाएंगे। अभियान का शुभारंभ प्रिंटिस गर्ल्स इंटर कॉलेज में मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की उपस्थिति में किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डीपीटी एक संयुक्त वैक्सीन है, जो डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी) और टिटनेस जैसी तीन खतरनाक बीमारियों से बच्चों को सुरक्षा प्रदान करती है। यह टीका शिशुओं को निर्धारित समय—छह, 10 और 14 सप्ताह पर दिया जाता है, जबकि बाद में बूस्टर डोज भी दी जाती है। वहीं टीडी वैक्सीन में टिटनेस और डिप्थीरिया से बचाव होता है, जो बड़े बच्चों, किशोरों और वयस्कों के लिए उपयोगी है। इसे खासतौर पर 10 और 16 वर्ष की आयु में बूस्टर के रूप में लगाया जाता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राम सिंह ने बताया कि समय पर टीकाकरण न होने से बच्चों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जबकि नियमित टीकाकरण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का टीकाकरण समय पर अवश्य कराएं, ताकि उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, जनपद में डीपीटी के तहत 8692 बच्चों, टीडी (10 वर्ष आयु वर्ग) के लिए 15908 और टीडी (16 वर्ष आयु वर्ग) के लिए 10304 बच्चों को टीकाकरण किया जाएगा। यह अभियान उन बच्चों तक भी पहुंचेगा, जो किसी कारणवश अब तक इन जरूरी टीकों से वंचित रह गए हैं।
इसके अलावा विभाग ने एचपीवी टीकाकरण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है, जो गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह टीकाकरण मेडिकल कॉलेज और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यापक अभियान के जरिए न केवल बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकेगा, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में गंभीर रोगों की रोकथाम संभव हो सकेगी।


