औरैया। जनपद के अजीतमल कस्बा स्थित फिरोजनगर कोटला मोहल्ले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस कार्यशैली और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक महिला ने कोतवाली में तैनात हेड कांस्टेबल पर घर में घुसकर अभद्रता करने और धारदार हथियार से हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना में महिला के पति और जेठ गंभीर रूप से घायल हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
पीड़िता ललिता पत्नी मोनू के अनुसार, वह अपने परिवार के साथ एक निमंत्रण कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौटी थीं। कुछ ही देर बाद उनके पति के मोबाइल पर हेड कांस्टेबल महेश गुप्ता का फोन आया, जिसमें परिवार के बारे में जानकारी ली गई। आरोप है कि इसके तुरंत बाद हेड कांस्टेबल उनके घर पहुंचा और बिना किसी कारण के गाली-गलौज करते हुए ललिता और उनकी 13 वर्षीय बेटी के साथ अभद्र व्यवहार करने लगा। जब परिवार ने इसका विरोध किया, तो मामला अचानक हिंसक रूप ले बैठा।
बताया जा रहा है कि शोर सुनकर जब पति मोनू और जेठ सोनू बीच-बचाव के लिए पहुंचे, तो हेड कांस्टेबल पहले से ही धारदार हथियार लेकर आया था। आरोप है कि उसने दोनों पर हमला कर दिया, जिसमें मोनू गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया, जबकि सोनू को भी गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजीतमल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मोनू की हालत नाजुक देखते हुए उसे सौ शैय्या अस्पताल, औरैया रेफर कर दिया गया।
इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी मनोज गंगवार ने लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि युवक ने खुद को घायल किया है और फिलहाल कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि संबंधित पुलिसकर्मी की ओर से यह चूक हुई कि वह बिना पर्याप्त पुलिस बल के अकेले मौके पर पहुंच गया, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर लापरवाही मानी जाती है। मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के अनुसार, घायल मोनू को रात करीब 10:30 बजे रेफर किया गया, लेकिन समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। कई बार कॉल करने के बावजूद करीब तीन घंटे तक कोई सहायता नहीं मिली, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ने की आशंका बनी रही। मजबूरी में परिजनों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े।
पीड़िता ने हेड कांस्टेबल महेश गुप्ता और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तहरीर देने की बात कही है, जबकि पुलिस का कहना है कि अभी तक आधिकारिक रूप से कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। इस विरोधाभास ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। घटना ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, जिससे आमजन में आक्रोश और असंतोष का माहौल है।


