– मुआवजा और कार्रवाई की मांग लेकर पहुंची SDM के पास
बरेली। बरेली जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आंवला थाना क्षेत्र की एक महिला नसबंदी के बावजूद गर्भवती हो गई, जिसके बाद उसने प्रशासन से न्याय और मुआवजे की गुहार लगाई है। इस घटना से स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
पीड़िता के अनुसार, वह पहले से चार बच्चों की मां है और उसकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। परिवार का गुजारा उसके पति की मजदूरी से चलता है। ऐसे में उसने परिवार नियोजन के तहत वर्ष 2021 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर में नसबंदी कराई थी, ताकि आगे संतान न हो।
महिला ने बताया कि कुछ समय पहले उसे गर्भावस्था के लक्षण महसूस हुए, जिसके बाद उसने 5 अप्रैल को आंवला के एक निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया। शुरुआती रिपोर्ट में गर्भ ठहरने की पुष्टि हुई, लेकिन उसे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि वह नसबंदी करा चुकी थी। इसके बाद 7 अप्रैल को जिला अस्पताल में जांच कराने पर डॉक्टरों ने उसे लगभग छह महीने से अधिक गर्भवती बताया।
रिपोर्ट मिलने के बाद महिला नसबंदी कराने वाले अस्पताल पहुंची और डॉक्टरों को दोनों जगह की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखाई। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी बात सुनने से इनकार कर दिया और रिपोर्ट को मान्यता नहीं दी। इससे पीड़िता को और अधिक मानसिक व आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
महिला का कहना है कि सरकार की ओर से ऐसे मामलों में 30 हजार रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन उसे अब तक कोई सहायता नहीं मिली। मुआवजे के लिए वह लगातार चक्कर काट रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
परेशान होकर महिला ने आंवला के एसडीएम कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उसने दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की है। उपजिलाधिकारी विदुषी सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


