– आपसी फूट और माफियातंत्र के असर नें करा दिया खेला
फर्रुखाबाद। जनपद की सदर विधानसभा सीट पर इस बार सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बड़े पैमाने पर वोट कम होने, अंदरूनी खींचतान और प्रशासनिक गतिविधियों के चलते यह सीट अब पूरी तरह से हाई प्रोफाइल मुकाबले में बदलती नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि “सदर विधायक का खेल जानबूझकर बिगाड़ा गया”, वहीं “सेनापति की फूट” ने समीकरण और ज्यादा उलझा दिए हैं। इन सबके बीच समाजवादी पार्टी को इस सीट पर मजबूती मिलती दिख रही है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार सदर विधानसभा में करीब 91 हजार से अधिक मतदाता कम हुए हैं, जो पूरे जिले में सबसे ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि यह कटौती सामान्य नहीं बल्कि सियासी असर डालने वाली है। शहरी वोटरों के कम होने और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर झुकाव बढ़ने से परंपरागत वोट बैंक का संतुलन बिगड़ गया है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि सत्ताधारी खेमे के भीतर “सेनापति” में आपसी खींचतान और फूट ने खेल कमजोर किया है। यही वजह है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है।
वहीं प्रशासनिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि पूरे घटनाक्रम में जिला प्रशासन की रणनीतिक सक्रियता ने भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है। कुछ दल और लोग इसे “डीएम की सियासत” करार देते हुए आरोप लगा रहे हैं कि कुछ फैसले एक खास दिशा में असर डालते दिखे।
इन परिस्थितियों के बीच समाजवादी पार्टी इस सीट पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते प्रभाव, स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और सत्ताधारी दल की आंतरिक कमजोरी का लाभ सपा को मिलता दिख रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता भी नए मतदाता समीकरण के हिसाब से सक्रिय हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सदर सीट पर इस बार बड़ा उलटफेर संभव है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी पक्ष अपनी रणनीति में कितना बदलाव कर पाता है और विपक्ष इस मौके को किस हद तक भुना पाता है।
वोटर कटौती, अंदरूनी फूट और प्रशासनिक चालों के बीच सपा मजबूत


