– सेनापति मे अंदरूनी घमासान के बीच है भाजपा के सामने नई चुनौती
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज है। 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों में दोनों दलों के नेताओं के बीच सीटों की संख्या और दावेदारी को लेकर मतभेद सामने आए हैं। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 में मौजूदा विपक्षी गठबंधन जारी रहने की बात कही है।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में फर्रुखाबाद सदर विधानसभा सीट का समीकरण भी चर्चा में है। यदि भविष्य में सपा और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तो दोनों दलों के वोट अलग-अलग प्रत्याशियों के पक्ष में जाने की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर, यदि दोनों दल एक साथ मैदान में उतरते हैं तो सीट पर मुकाबले का स्वरूप अलग हो सकता है। यह एक संभावित चुनावी परिदृश्य है, निश्चित परिणाम का आकलन नहीं।
2022 के विधानसभा चुनाव में फर्रुखाबाद सदर सीट से भाजपा के मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को 1,12,314 वोट मिले थे, जबकि सपा प्रत्याशी को 72,998 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी लुईस खुर्शीद को 2,045 वोट मिले थे। भाजपा ने लगभग 39 हजार वोटों के अंतर से सीट जीती थी।
इन आंकड़ों को केवल 2027 के संभावित परिणाम का संकेत मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि अगले चुनाव में उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, दलों के गठबंधन, प्रचार अभियान और मतदाताओं की पसंद बदल सकती है। फर्रुखाबाद सदर में भाजपा, सपा और कांग्रेस के अलग-अलग संगठनात्मक आधार और स्थानीय दावेदार हैं। ऐसे में गठबंधन न होने की स्थिति में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और वोटों का विभाजन चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है।
फिलहाल सपा-कांग्रेस के बीच औपचारिक सीट-बंटवारे की तस्वीर स्पष्ट नहीं है। सितंबर में अमर उजाला ने रिपोर्ट किया था कि दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर औपचारिक वार्ता और समन्वय समिति की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी।
फर्रुखाबाद सदर की लड़ाई इसलिए दिलचस्प होगी कि 2022 में भाजपा ने मजबूत अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि सपा दूसरे स्थान पर रही और कांग्रेस का वोट अपेक्षाकृत सीमित था। 2027 में गठबंधन की स्थिति, प्रत्याशी चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण इस सीट की तस्वीर को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक होंगे।


