लखनऊl प्रदेश में फरवरी माह का वेतन समय पर जारी न होने से कर्मचारियों और पेंशनधारकों में नाराजगी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया था कि फरवरी की सैलरी माह के भीतर ही खातों में पहुंच जाए, क्योंकि एक मार्च को रविवार और दो से चार मार्च तक अवकाश है। इसके बावजूद 28 फरवरी तक कई विभागों का वेतन जारी नहीं हो सका और एक मार्च की सुबह तक भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों व पेंशनर्स के खातों में धनराशि क्रेडिट नहीं हुई। शासन स्तर पर सर्वर डाउन होने को देरी का कारण बताया जा रहा है, लेकिन इससे कर्मचारियों में असंतोष है।
दूसरी ओर, यूपी बोर्ड परीक्षा के बीच शिक्षकों की ड्यूटी और होली अवकाश को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव द्वारा जारी सख्त आदेश के बाद परीक्षा कार्य से जुड़े शिक्षकों, केंद्र व्यवस्थापकों और अधिकारियों को बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं दी जा रही है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की लिखित अनुमति के बिना कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। संयुक्त व अपर शिक्षा निदेशक भी बिना स्वीकृति अवकाश पर नहीं जा सकेंगे। उल्लंघन की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
निर्देशों में अवकाश अवधि के दौरान भी स्ट्रांग रूम की सतत निगरानी, आकस्मिक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था, गोपनीयता और सीसीटीवी जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। हालांकि राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय और प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि 1 से 8 मार्च के बीच कोई परीक्षा नहीं है, ऐसे में शिक्षकों को होली पर गृह जनपद जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली, रमजान और ईद को देखते हुए कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि त्योहारों के दौरान माहौल बिगाड़ने वाले उपद्रवियों से सख्ती से निपटा जाए और ऐसी कार्रवाई की जाए जो नजीर बने। यदि सौहार्द बिगाड़ने की कोई घटना होती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सीएम ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को संवेदनशीलता और सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराए जाएं। बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर भी अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता बताई गई है। बीते पांच वर्षों की घटनाओं की समीक्षा कर प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने, पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने और शोभायात्राओं के दौरान विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन और जन-शिकायत निस्तारण की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि होलिका दहन सुरक्षित स्थानों पर ही हो और कहीं भी अभद्र गीत-संगीत न बजाया जाए। किसी भी वर्ग या समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाली गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। कानफोड़ू आवाज वाले लाउडस्पीकरों को हटाने, धर्मस्थलों पर ध्वनि प्रदूषण के मानकों का पालन कराने और सोशल मीडिया की कड़ी निगरानी के भी आदेश दिए गए हैं। साथ ही त्योहारों और बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वेतन भुगतान में देरी, शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर असमंजस और त्योहारों पर कड़े प्रशासनिक निर्देश—इन तीनों मुद्दों ने प्रदेश में प्रशासनिक और सामाजिक हलचल को तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि शासन स्तर पर वेतन भुगतान की समस्या कब तक सुलझती है और त्योहारों के बीच कानून-व्यवस्था को किस तरह संतुलित रखा जाता है।

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