सवाल पूछे गए। हालांकि सांसद मुकेश राजपूत और अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने इस बैठक से दूरी बनाई और वह शामिल नहीं हुए। सूत्रों के माने तो प्रभारी मंत्री के सामने हुए इस पूरे प्रकरण की भूमिका 2 दिन पूर्व ही बन गई थी।
जिला प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषित “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों पर सख्त प्रहार जारी रहेगा, चाहे आरोपी कोई भी हो।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। एक ओर प्रशासन अपराध और नेटवर्क पर प्रहार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता संगठन के भीतर से उठ रहे सवालों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। चौंकाने वाली बात यह मानी जा रही है कि जिस नीति के तहत कार्रवाई हो रही है, उसी पर स्थानीय स्तर पर प्रश्नचिह्न खड़े होते दिखे।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन सर्किट हाउस की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि अपराध के खिलाफ कार्रवाई अब सियासी विमर्श का केंद्र बन चुकी है।
आशीष पांडे पहले से अनुपम की करता रहा पर भी
कुख्यात माफिया अनुपम दुबे पर प्रशासन द्वारा पूर्व की कार्रवाई को लेकर हो गई भोगांव मैनपुरी निवासी हो पूर्व मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री का बेहद करीबी साथिर आशीष पांडे कि पहले भी में प्रमुख रहा उसने कथित ब्राह्मण संगठन के माध्यम से जिला प्रशासन को पहले भी गर्ने का प्रयास किया था और वह पदयात्रा लेकर फर्रुखाबाद मार्च करने भी आ रहा था जिसे पूर्व में काली नदी पर रोक दिया गया था भोगांव विधायक रामनरेश अग्निहोत्री पहले से ही खुलेआम माफिया अनुपम दुबे की पर भी शासन में भी करते रहे हैं हालांकि मुख्यमंत्री के हंटर के कारण उनकी सुनवाई नहीं हुई।
जीरो टॉलरेंस पर सियासी सवाल? बीजेपी कोर कमेटी भी हुईं एक


