शातिर अपराधियों के मनगढ़ंत आरोपों से पुलिस को बदनाम करने का प्रयास

फर्रुखाबाद। जनपद में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ चल रही जीरो टॉलरेंस नीति के बीच अब पुलिस को ही कटघरे में खड़ा करने की साजिश सामने आई है। पूर्व एसओजी प्रभारी एवं मऊ दरवाजा थाना अध्यक्ष रह चुके वीआईपी सेल प्रभारी इंस्पेक्टर अमित गंगवार के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों के जरिए पुलिस को घेरने और बदनाम करने की नई साजिश रची गई है,वहीं पुलिस महकमा पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बता रहा है।

पुलिस अधीक्षक को दिए गए एक प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि 21 दिसंबर की रात ठेका बंद होने के बाद एक जनरल स्टोर पर कुछ लोग शराब पी रहे थे। इसी दौरान इंस्पेक्टर अमित गंगवार वहां पहुंचे और कथित रूप पेग उठा कर शराब पीने लगे। आरोप है कि उन्होंने ठेका मालिक पर जबरन ठेका खुलवाने का दबाव बनाया, गाली-गलौज की और फोन कर अन्य पुलिसकर्मियों को मौके पर बुला लिया।

शिकायत में यह भी कहा गया कि अंशुमान पुत्र राम सनेही निवासी बनखड़िया के साथ मारपीट की गई, उसे घर के सामने पीटा गया और बंधक बनाकर कमालगंज की ओर ले जाते हुए इनकाउंटर की धमकी दी गई। बाद में फतेहगढ़ कोतवाली ले जाकर दोबारा मारपीट कर जबरन माफीनामा लिखवाने का भी आरोप लगाया गया।

इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इंस्पेक्टर अमित गंगवार ने बताया कि वह केवल जनरल स्टोर से घरेलू सामान लेने गए थे। उसी दौरान पहले से शराब के नशे में मौजूद कुछ लोगों ने अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने तत्काल फतेहगढ़ कोतवाली को सूचना दी।

फतेहगढ़ कोतवाली प्रभारी ने स्पष्ट किया कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम के साथ अंशुमान ने बदतमीजी की और वह शराब के नशे में था। उसे नियमानुसार कोतवाली लाया गया, मेडिकल कराया गया जिसमें नशे की पुष्टि हुई। इसके बाद विधिक कार्रवाई कर माफीनामा भरवाते हुए उसे उसकी पत्नी के सुपुर्द कर दिया गया।

सबसे अहम सवाल यह है कि जिस घटना को 21 दिसंबर का बताया जा रहा है, उसका प्रार्थना पत्र 29 दिसंबर को दिया गया। इन सात दिनों के दौरान अंशुमान कहां रहा, इसका कोई ठोस जवाब शिकायतकर्ता पक्ष नहीं दे सका। वहीं घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में भी किसी तरह की मारपीट या अवैध पुलिस कार्रवाई की पुष्टि नहीं होती है।

सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला पुलिस की सख्ती से नाराज कुछ शातिर आपराधिक तत्वों की सोची-समझी साजिश प्रतीत होता है, जिनका उद्देश्य पुलिस की छवि धूमिल करना और एक ईमानदार अधिकारी को फंसाना है।

प्रशासन का कहना है कि फिलहाल केवल प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है, अभी कोई औपचारिक जांच शुरू नहीं की गई है। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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