नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले में गंभीर सवाल और चौंकाने वाले विरोधाभास सामने आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार SIT जांच के दौरान कई अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा हो गया है।
SIT जांच में बयानों का टकराव
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह सामने आया है कि घटनास्थल पर पहुंचने के समय को लेकर अधिकारियों ने अलग-अलग बयान दर्ज कराए हैं। किसी अधिकारी ने मौके पर तत्काल पहुंचने की बात कही, तो किसी ने देरी से पहुंचने की बात स्वीकार की। यही नहीं, समय और कार्रवाई को लेकर दिए गए विवरणों में स्पष्ट विरोधाभास पाया गया है।
SIT को यह भी जानकारी मिली है कि घटनास्थल पर पुलिस और संबंधित विभागों के पहुंचने का समय रिकॉर्ड में गलत तरीके से दर्ज किया गया। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि मामले को हल्का दिखाने या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई।
जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि 31 दिसंबर को हुए ट्रक हादसे को गंभीरता से नहीं लिया गया, जबकि वही हादसा आगे चलकर युवराज की मौत से जुड़ा अहम कड़ी साबित हो सकता था। यदि उस समय संज्ञान लिया गया होता, तो शायद हालात कुछ और हो सकते थे।
सेक्टर-150 में बिल्डर के प्लॉट पर हुई मौत
यह भी सामने आया है कि इंजीनियर युवराज की मौत सेक्टर-150 स्थित एक बिल्डर के प्लॉट में हुई। इस प्लॉट से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। SIT इस बात की भी जांच कर रही है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
प्रशासनिक लापरवाही या साजिश?
लगातार सामने आ रहे विरोधाभासों ने इस सवाल को जन्म दे दिया है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश की गई। युवराज के परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते ईमानदारी से कार्रवाई होती, तो आज उनका बेटा जिंदा होता।

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