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Wednesday, April 8, 2026

“जंग हमने नहीं शुरू की…”: ईरान की 10 शर्तों का दावा, अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव तेज

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नई दिल्ली/तेहरान। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक बयान सामने आया है। भारत में ईरान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से किए गए पोस्ट में कहा गया है कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने की, लेकिन इसे समाप्त करने की शर्तें ईरान तय करेगा। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान की 10 सूत्रीय शर्तों को “वर्केबल” माना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस दावे की विश्वसनीयता पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
ईरान द्वारा बताई गई शर्तों में सबसे प्रमुख मांग अमेरिका की ओर से भविष्य में किसी भी प्रकार की आक्रामकता न करने की गारंटी है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को मान्यता देने की भी मांग रखी है, जो लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ विवाद का केंद्र रहा है।
इसके साथ ही ईरान ने सभी प्रकार के अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने की बात कही है, जिसमें प्राथमिक और द्वितीयक दोनों प्रतिबंध शामिल हैं। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रस्तावों और निगरानी व्यवस्था को खत्म करने की मांग भी शामिल है। ईरान ने यह भी कहा है कि उसे पिछले वर्षों में हुए आर्थिक और सैन्य नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए।
मांगों की सूची में मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना की वापसी भी प्रमुख रूप से शामिल है, जो लंबे समय से ईरान की रणनीतिक प्राथमिकता रही है। इसके अलावा लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने की बात भी कही गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस मुद्दे को व्यापक क्षेत्रीय समाधान के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है।
हालांकि इन दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ईरान का विदेश मंत्रालय और अमेरिकी विदेश विभाग दोनों में से किसी ने भी इस कथित 10 सूत्रीय समझौते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यह बयान वास्तविक कूटनीतिक सहमति से ज्यादा एक रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है, जिसके जरिए ईरान वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
मिडिल ईस्ट में पहले से जारी तनाव और संघर्ष के बीच इस तरह के बयान का असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। खासकर ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है या यह मामला केवल बयानबाजी तक ही सीमित रहता है।

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