– जनपद का एकमात्र वन चेतना केंद्र आज पूरी तरह नष्ट
– जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासन दोनों अनजान

फर्रुखाबाद। एक समय था जब निनउआ स्थित वन चेतना केंद्र जिले की पहचान हुआ करता था। 1990 के दशक में यहां का लघु चिड़ियाघर बच्चों, परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र था। सप्ताहांत पर सैकड़ों लोग यहां सुकून की तलाश में पहुंचते थे। पिंजरों में चहकते पक्षी, हिरन, खरगोश और अन्य जीव-जंतु इस स्थान को जीवंत बनाए रखते थे। हरियाली से आच्छादित परिसर पर्यावरण शिक्षा का भी माध्यम था।
लेकिन आज वही वन चेतना केंद्र उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुका है।
1990से 1996 के बीच यहां दर्जनों वन्यजीव और सैकड़ों पक्षी रखे जाते थे। स्कूलों की शैक्षिक यात्राएं नियमित होती थीं। वन विभाग द्वारा समय-समय पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाते थे। अनुमान है कि छुट्टी के दिनों में 300 से 500 तक आगंतुक यहां पहुंचते थे।
यह केंद्र न केवल मनोरंजन स्थल था, बल्कि पर्यावरण जागरूकता का भी प्रमुख माध्यम था।
वर्तमान स्थिति चिंताजनक है—
पिंजरे खाली या जर्जर अवस्था में हैं।परिसर में झाड़ियां और गंदगी पसरी है।सुरक्षा व्यवस्था और नियमित रखरखाव का अभाव है।
नए जीवों की व्यवस्था वर्षों से नहीं हुई।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पिछले दो दशक से इस केंद्र के पुनरुद्धार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वन विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय—तीनों की जिम्मेदारी तय है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस धरोहर को बचाने की पहल कौन करेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चरणबद्ध योजना बनाकर—
बुनियादी ढांचे की मरम्मत,
हरित क्षेत्र का पुनर्विकास,
बच्चों के लिए नेचर पार्क और ओपन जू मॉडल,तथा स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए,तो यह स्थल फिर से जीवंत हो सकता है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है।
निनउआ और आसपास के ग्रामीणों की मांग है कि वन चेतना केंद्र को पुनर्जीवित किया जाए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए तो यह स्थान एक बार फिर जिले की शान बन सकता है।फिलहाल यह केंद्र बीते समय की यादों के सहारे खड़ा है—मानो जिम्मेदारों की एक नजर का इंतजार कर रहा हो।

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