यूथ इंडिया एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन फर्जी खबरों का गैंग: दो नेटवर्कों के जरिए बदनाम करने और वसूली शातिर अवधेश मिश्रा का जनमानस मे रहा खेल

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विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी सुशील शाक्य, अमर सिंह खटीक, पुलिस अधीक्षक,सीईओ, थाना अध्यक्ष प्रभारी निरीक्षक, चिकित्सक, शिक्षक, प्रधानाध्यापक, पत्रकार सभी रहे निशाने पर
यूथ इंडिया (शरद कटियार)
फर्रुखाबाद। जनपद में लंबे समय से चर्चा में रहे फर्जी खबरों के नेटवर्क की अब परतें खुलने लगी हैं। यूथ इंडिया की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि दो समानांतर गैंग सक्रिय थे, जो सोशल मीडिया और बेनामी अखबारों के जरिए प्रतिष्ठित लोगों, अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल करने का संगठित खेल खेल रहे थे।
इनमें से पहला नेटवर्क शातिर वकील अवधेश मिश्रा के नेतृत्व में संचालित बताया जा रहा है, जिसने अपने करीबियों और गुर्गों के सहारे गुनाह का सच नामक हरदोई से प्रकाशित एक बेनामी अखबार के माध्यम से फर्जी खबरें प्रकाशित करवाईं। इन खबरों में नगर के संविधाननिष्ठ लोगों, पत्रकारों, राजनेताओं, और पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया गया।
सूत्रों के अनुसार, अवधेश मिश्रा ने मोहम्मदाबाद क्षेत्र के शिवाजी नगर निवासी राजीव शुक्ला पुत्र लालमन को मोहरा बनाकर उसके जरिये इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया। इस गैंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म,विशेष रूप से फेसबुक,पर असंवैधानिक भाषा का प्रयोग करते हुए प्रशासन और समाज में भ्रम फैलाने का काम किया।
इस नेटवर्क की खबरों में आईपीएस अशोक कुमार मीणा, भाजपा विधायक सुशील शाक्य, पत्रकार विवेक मिश्रा, पूर्व विधायक अमर सिंह खटीक, सीईओ कायमगंज डॉ. के.एम. द्विवेदी, डॉ. राजीव पाठक, योगी सूरज अल्ट्रासाउंड सेंटर के मालिक, थाना प्रभारी नवाबगंज राकेश शर्मा, कमालगंज के थानाध्यक्ष अजय नारायण सिंह, फतेहगढ़ प्रभारी दिनेश यादव, सपा नेता विजय यादव, डॉ. शैलेंद्र यादव (जेएस ग्रुप) सहित कई संभ्रांत नागरिकों को टारगेट किया गया। बाद मे अवधेश के गुर्गे राजीव शुक्ला पर कई मुकदमे पुलिस ने दर्ज किये, वो रंगदारी और सूचना प्रौद्योगिकी की धारा में जेल भेजा गया,तब यह खेल थमा।
सूत्र बताते हैं कि अवधेश मिश्रा ने इस नेटवर्क से वित्तीय लाभ भी अर्जित किया, जबकि उसका दूसरा सहयोगी नेटवर्क राजनीतिक संपर्कों और सोशल मीडिया बॉट अकाउंट्स के ज़रिए झूठ फैलाने में लगा रहा।
इस गिरोह में अवधेश मिश्रा की पत्नी रीता मिश्रा, कई शातिर सजातीय,ट्रक ड्राइवर सत्यनारायण सिंह, और कुछ अन्य लोग भी सक्रिय भूमिका में हैं। इन नेटवर्कों ने फर्जी मुकदमे, झूठी पोस्टें, और बेनामी पत्रकारीय मंचों के सहारे जिले के सामाजिक ढांचे को अस्थिर करने का प्रयास किया। कई शिक्षकों, प्रधानों और समाजसेवकों को झूठे आरोपों में फंसाया गया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क अब भी सोशल मीडिया पर सक्रिय है, जो झूठे दावों के माध्यम से भ्रम फैलाने का प्रयास करता है। कुछ प्रोफाइल्स लगातार अवधेश मिश्रा के बचाव में पोस्ट डाल रही हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह गिरोह अभी भी पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ है। यूथ इंडिया की जांच के अनुसार, इस पूरे मामले में प्रशासनिक और साइबर स्तर पर जांच की आवश्यकता है, क्योंकि यह केवल बदनाम करने का नहीं बल्कि जनपद की संवैधानिक व्यवस्था और पत्रकारिता की साख को चोट पहुंचाने का संगठित प्रयास है।
शरद कटियार नें कहा, पत्रकारिता का कर्तव्य है सच को सामने लाना, चाहे उसके पीछे कितना भी प्रभावशाली चेहरा क्यों न हो। यह केवल बदनाम करने की साजिश नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है। अब समय है कि कानून बोले और सच सामने आए।
(यूथ इंडिया, जांच जारी है। अगली रिपोर्ट में जानिए: कैसे चलाया गया सोशल मीडिया का झूठ फैलाने वाला नेटवर्क और किसने दी थी अंदरूनी मदद।)

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