लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हलाल सर्टिफिकेशन पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे राज्य में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा था और इसके जरिए बड़े पैमाने पर आर्थिक शोषण तथा अवैध फंडिंग की जा रही थी। जांच में सामने आया है कि हर साल लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का लेन-देन हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर होता था, जबकि इसे किसी भी सरकारी एजेंसी की मान्यता प्राप्त नहीं थी।
सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि अगर हलाल सर्टिफिकेट गलत है तो इसे पूरे देश में बैन क्यों नहीं किया गया। सपा नेता सुनील साजन ने आरोप लगाया कि सरकार धर्म की आड़ में समाज को बांटने का काम कर रही है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने योगी सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि हलाल के नाम पर एंटी-नेशनल गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा था। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भी माना कि शरीयत में हलाल सर्टिफिकेट का कोई विशेष दर्जा नहीं है, जबकि मौलाना साजिद रशीदी ने इसे संविधान विरोधी बताया।
दरअसल, ‘हलाल’ एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ होता है — वैध या अनुमति प्राप्त। इसका प्रयोग आमतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं के लिए किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें इस्लाम में हराम मानी जाने वाली कोई भी चीज शामिल न हो। भारत में हलाल सर्टिफिकेट जारी करने का कोई सरकारी तंत्र नहीं है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) केवल खाद्य सुरक्षा के मानक तय करता है, लेकिन हलाल प्रमाणन नहीं करता। देश में कुछ निजी संस्थाएं — जैसे हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट — इस तरह के सर्टिफिकेट जारी करती हैं। कोई भी कंपनी आवेदन कर उत्पाद की जांच करवाकर यह सर्टिफिकेट हासिल कर सकती है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
सरकार का कहना है कि कई कंपनियां बिना जांच के ही पैसे देकर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल कर रही थीं। यूपी में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें हलाल सर्टिफिकेशन का इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने और धार्मिक आधार पर बाजार को प्रभावित करने के लिए किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि बलरामपुर में मतांतरण के मामलों में लिप्त छांगुर नामक व्यक्ति विदेशी फंडिंग प्राप्त कर हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर मिले धन का दुरुपयोग कर रहा था। उन्होंने अपील की कि जनता सामान खरीदते समय इस बात पर ध्यान दे कि उस पर हलाल सर्टिफिकेशन अंकित न हो। योगी ने तंज कसते हुए कहा, “अब तो माचिस तक हलाल बताई जा रही है, जबकि वह तो झटके में ही जल जाती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार ने हलाल सर्टिफिकेशन को कभी मान्यता नहीं दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर जुटाई गई धनराशि का उपयोग आतंकवाद, लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों में किया जा रहा था। योगी सरकार का यह कदम अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष इसे राजनीतिक फैसला बता रहा है, जबकि समर्थक इसे “राष्ट्रहित में आवश्यक कदम” मान रहे हैं।




