लखनऊ/नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए पहचान और सर्टिफिकेट की राजनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में पूरी तरह उतरे अखिलेश यादव ने कहा
“वो योगी कब हो गए? सर्टिफिकेट कहां से मिला? अगर वो दूसरे का सर्टिफिकेट मांग सकते हैं तो अपना भी दिखाएं।”
अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर सरकार द्वारा शंकराचार्य होने के प्रमाण स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद से मांगते हुए जिला प्रशासन प्रयागराज से नोटिस जारी कराया गया था उसके विरोध में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग दूसरों से दस्तावेज़ और प्रमाण मांगते हैं, तो उन्हें भी उसी कसौटी पर खुद को प्रस्तुत करना चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा सरकार दोहरा मापदंड अपनाती है—एक तरफ आम लोगों पर नियमों की सख्ती और दूसरी तरफ सत्ता से जुड़े लोगों को छूट। अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबके लिए बराबर होनी चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या मुख्यमंत्री।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अखिलेश यादव का यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली और नैरेटिव राजनीति पर सीधा हमला है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश की राजनीति में पहचान, अधिकार और दस्तावेज़ों को लेकर बहस तेज है।
अखिलेश यादव के इस तंज के बाद सत्तापक्ष की ओर से जवाब आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं विपक्ष इस बयान को जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताकर और मुखर करने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस की वजह बन सकता है।






