लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति (Politics) में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। सत्तारूढ़ गलियारों में चर्चा है कि योगी सरकार (Yogi government) में जल्द ही ऐसा बदलाव हो सकता है, जो अब तक के सबसे बड़े कैबिनेट र रेशुफ्फले में से एक होगा।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि जिस तरह गुजरात में पिछले वर्ष अचानक कैबिनेट में व्यापक बदलाव कर लगभग सभी पुराने चेहरों को बाहर कर दिया गया था, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी बड़ा प्रयोग हो सकता है। माना जा रहा है कि सरकार संगठन और प्रशासनिक प्रदर्शन के आधार पर मंत्रियों का मूल्यांकन कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, 70 फीसदी से अधिक मंत्रियों को हटाया या उनके विभाग बदले जा सकते हैं। कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है, जबकि कुछ नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। इस फेरबदल में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और 2027 की चुनावी रणनीति को विशेष रूप से ध्यान में रखा जा रहा है।
संगठन की रिपोर्ट पर होगा फैसला
बताया जा रहा है कि मंत्रियों के कामकाज, जनप्रतिनिधियों से संवाद, विकास कार्यों की गति और जनता के बीच छवि को लेकर संगठन स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर नेतृत्व अंतिम निर्णय ले सकता है। अगर यह फेरबदल होता है तो इसे योगी सरकार का सबसे आक्रामक और निर्णायक कदम माना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इससे एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि सरकार में पद नहीं, बल्कि प्रदर्शन ही प्राथमिकता है।फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सत्ता के गलियारों में बढ़ती गतिविधियां इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति जल्द ही एक बड़े बदलाव की गवाह बन सकती है।


