लखनऊ: अवैध मदरसों के संचालन और संदिग्ध विदेशी वित्तपोषण (suspected foreign funding) के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार (Yogi government) ने मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान से जुड़े मदरसों, संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पहले से ही मामले की जांच कर रहा है। अब एसआईटी भी विस्तृत जांच करेगी।
आजमगढ़ के संभागीय आयुक्त और पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करके सरकार को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। सरकार के इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि मदरसों के संचालन की आड़ में वित्तीय अनियमितताओं, विदेशी वित्तपोषण या प्रशासनिक मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जांच के अनुसार, शमशुल हुदा 2007 से यूनाइटेड किंगडम में रह रहे थे और ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त करने के बाद उन्होंने 2013 में भारतीय नागरिकता त्याग दी थी। इसके बावजूद, वे 2017 तक आज़मगढ़ के एक मदरसे में सहायक शिक्षक के रूप में काम करते रहे और इस दौरान उन्हें सरकारी वेतन मिलता रहा। बाद में उन्हें पेंशन भी दी गई।
एटीएस की जांच में मदरसा प्रबंधन और अधिकारियों की मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है। इस मामले में राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडे, पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकश सिंह और अधिकारियों लालमन, प्रभात कुमार और इरशाद अहमद को निलंबित कर दिया है।
शमशुल हुदा से जुड़े दो मदरसों की मान्यता भी रद्द कर दी गई है। इनमें संत कबीर नगर स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रज़विया (निस्वा) और आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम शामिल हैं। एसआईटी अब इन मदरसों के कामकाज की जांच करेगी और इनसे जुड़े लोगों की वित्तीय और कथित अवैध गतिविधियों की छानबीन करेगी।
संत कबीर नगर स्थित मदरसे से जुड़े मामले में शमशुल हुदा के खिलाफ खालिलाबाद कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के तहत, शमशुल और उनके परिवार के नाम पर सात बैंकों में मौजूद 18 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जिससे लगभग 94.23 लाख रुपये की निकासी प्रतिबंधित हो गई है।
इस मामले में मदरसे के प्रबंधक, दो पूर्व प्रधानाचार्यों और एक क्लर्क के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है। मदरसे पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। राज्य सरकार ने आगे की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय के साथ संबंधित दस्तावेज भी साझा किए हैं।


