लखनऊ। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर योगी सरकार के दावों को मजबूती देते हुए कारखानों के पंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में रजिस्टर्ड कारखानों की कुल संख्या बढ़कर 32,017 पहुंच गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी छलांग मानी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल 14,176 कारखाने ही पंजीकृत थे। इसके बाद बीते लगभग 9 वर्षों में 17,841 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जिससे यह संख्या दोगुने से भी अधिक हो गई है। यह वृद्धि प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की ओर संकेत करती है।
खास बात यह है कि सितंबर 2023 से अब तक ही 10,194 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है, जो हाल के समय में तेज औद्योगिक विकास को दर्शाता है। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 4,746 कारखानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो इस रफ्तार को और मजबूत करता है।
सरकार का दावा है कि प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, पारदर्शी नीतियां और निवेशकों के अनुकूल माहौल के कारण उद्योगों का भरोसा बढ़ा है। इसके चलते देश-विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं और नए उद्योग स्थापित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में और मजबूती से अपनी जगह बना सकता है। वहीं विपक्ष इस पर सवाल भी उठा रहा है कि आंकड़ों के साथ-साथ रोजगार सृजन और जमीनी प्रभाव का आकलन भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, कारखानों के पंजीकरण में यह वृद्धि प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में हो रहे बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।
योगी सरकार में उद्योगों को रफ्तार, कारखानों के रजिस्ट्रेशन में रिकॉर्ड वृद्धि


