लखनऊ
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में बड़ा बयान देते हुए कहा कि यूपी अब ‘बीमारू राज्य’ की छवि से बाहर निकल चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष से 1400 करोड़ रुपये लोगों के इलाज पर खर्च किए गए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत भी जरूरतमंदों को 5 लाख रुपये तक की सहायता मिल रही है।
सीएम योगी ने स्वास्थ्य ढांचे में हुए विस्तार को गिनाते हुए बताया कि पहले प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से इनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इसके अलावा राज्य में दो एम्स भी स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और मजबूत हुई है।
उन्होंने बड़े सरकारी अस्पतालों में बढ़ती भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में रोजाना 12 से 14 हजार मरीजों की ओपीडी होती है, जबकि संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में 10 से 11 हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या को संभालने के लिए अब टेलीमेडिसिन और टेली-ICU जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू की गई हैं, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान सीएम ने बदलती जीवनशैली को भी बीमारियों का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि 4 से 6 घंटे तक स्मार्टफोन का उपयोग एक नई समस्या बन गया है, जिससे डायबिटीज और हृदय रोग जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों को समय पर सोने-जागने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।
यह बातें उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में आयोजित नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल-2026 के दौरान कहीं। इस मौके पर देशभर के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ मौजूद रहे। सीएम योगी ने कहा कि सरकार इलाज के साथ-साथ जागरूकता पर भी जोर दे रही है, ताकि लोग बीमारियों से बचाव के लिए पहले से सतर्क रहें।


