यूपी भाजपा अध्यक्ष चुनाव के बाद योगी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के संकेत, दिसंबर में विस्तार की तैयारी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को रविवार को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद राज्य की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में दिसंबर के भीतर ही फेरबदल और विस्तार के प्रबल आसार बनते दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक खरमास के दौरान ही, 31 दिसंबर से पहले मंत्रिमंडल में बदलाव किया जा सकता है, ताकि आगामी पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को मजबूती दी जा सके।

भाजपा नेतृत्व प्रदेश संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर संतुलन बनाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही एक-दो राज्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने की संभावना है, जबकि कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। यह पूरा फेरबदल जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि पार्टी को चुनावी तौर पर अधिक मजबूती मिल सके।

दिल्ली से लेकर लखनऊ तक मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में न केवल भाजपा बल्कि सहयोगी दलों के विधायकों को भी मंत्री पद दिया जा सकता है। इतना ही नहीं, राज्य को नया उप मुख्यमंत्री मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। इस दौड़ में केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा से विधायक पंकज सिंह को भी योगी सरकार में मंत्री बनाए जाने की चर्चा है।

मंत्रिमंडल में फिलहाल 54 मंत्री हैं, जबकि कुल 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में करीब छह नए लोगों को शामिल करने की गुंजाइश बताई जा रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है। संभावित विस्तार में समाजवादी पार्टी से बगावत कर चुके विधायकों को भी जगह मिल सकती है। पूजा पाल, मनोज पांडेय और महेंद्र सिंह जैसे नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और दो से तीन सपा बागियों के मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के तुरंत बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। माना जा रहा है कि यह फेरबदल न सिर्फ सरकार के कामकाज को गति देगा, बल्कि 2027 के चुनावी रण के लिए भाजपा की रणनीति को भी धार देगा।

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