प्रदेशभर में प्रतिमाओं पर लगेगा छत्र, होगा सौंदर्यीकरण
गोरखपुर। प्रदेश की राजनीति में दलित समाज को साधने की कोशिशों के बीच सोमवार को योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि प्रदेशभर में जहां कहीं भी भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित है, वहां उसके ऊपर छत्र लगाया जाएगा। इसके साथ ही रविदास और वाल्मीकि की प्रतिमाओं का भी सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा गोरखपुर के रामलीला मैदान में आयोजित भाजपा के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय किया है कि 14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती के अवसर पर प्रदेशभर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत भाजपा कार्यकर्ता बूथ स्तर पर एक दिन पहले यानी 13 अप्रैल को प्रतिमाओं के आसपास साफ-सफाई अभियान चलाएंगे और 14 अप्रैल को पूरे सम्मान के साथ पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
सीएम योगी ने आगे कहा कि जिन स्थानों पर बाबा साहब की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां पार्कों की बाउंड्री कराई जाएगी और उनका सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा, ताकि इन स्थलों को सम्मानजनक और व्यवस्थित रूप दिया जा सके। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और कार्यक्रम की तस्वीरें साझा कर संगठन को मजबूत करें।
अपने गोरखपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कई कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर परिसर में भाजपा का ध्वज फहराया और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। इसके अलावा गोरखपुर प्रेस क्लब के कार्यकारिणी सदस्यों को शपथ दिलाई और डॉ. तेज प्रताप शाही कंप्यूटर लैब एवं रिसर्च सेंटर का उद्घाटन भी किया।
राजनीतिक दृष्टि से मुख्यमंत्री का यह ऐलान बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी दलित समाज को अपने पक्ष में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और विभिन्न महापुरुषों की जयंती के जरिए सामाजिक समीकरण साधने में जुटी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कदम सीधे तौर पर दलित वर्ग को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 21 प्रतिशत दलित मतदाता आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी का यह ऐलान इसी कड़ी में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है।


