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Sunday, April 5, 2026

स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का भव्य शुभारंभ, सीएम योगी ने किया उद्घाटन

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सांस्कृतिक परंपरा और रंगमंच की समृद्ध विरासत को समर्पित स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का भव्य शुभारंभ किया गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी परिसर में किया गया, जहां देशभर से आए कलाकारों, रंगकर्मियों और कला प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और कलात्मक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने कहा कि नाट्य कला समाज का दर्पण होती है, जो समय-समय पर सामाजिक परिवर्तनों, संघर्षों और मूल्यों को मंच के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने भारतेन्दु नाट्य अकादमी की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान वर्षों से नाट्य विधा के संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियों का मंचन किया गया, जिनमें ऐतिहासिक प्रसंगों, सामाजिक मुद्दों और समकालीन विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की सशक्त अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और मंच सज्जा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में पारंपरिक और आधुनिक रंगमंच का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कला और संस्कृति के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नाट्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करें और भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाएं।
समारोह में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सांस्कृतिक विभाग के प्रतिनिधि, प्रसिद्ध रंगकर्मी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई थीं। पूरे परिसर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
यह स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह न केवल रंगमंच की ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति और उसकी जीवंत परंपरा का भी प्रतीक बनकर उभरा है।

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