लखनऊ | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों के प्रति स्नेह, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता उन्हें एक कठोर प्रशासक के साथ-साथ मानवीय नेतृत्वकर्ता के रूप में भी स्थापित करती है। जिनका नाम सुनकर अपराधी कांपते हैं, उन्हीं मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश भर के बच्चे निश्छल मन और बालहठ के साथ अपनी बात रखते हैं—और मुख्यमंत्री उतनी ही आत्मीयता से उन्हें सुनते भी हैं।
नर्सरी में प्रवेश के लिए जिद करती मासूम बच्ची हो या चॉकलेट मांगते बच्चे—मुख्यमंत्री से मिलते ही बच्चों के चेहरे पर डर नहीं, भरोसा दिखाई देता है। हाल ही में एक छोटी बच्ची ने मुख्यमंत्री को सैल्यूट किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उसे मन लगाकर पढ़ने की सीख दी। यह दृश्य मुख्यमंत्री के बाल प्रेम और सर्वसुलभ स्वभाव को दर्शाता है।
‘जनता दर्शन’ में मां के साथ पहुंची नन्ही अनाबी अली से मुख्यमंत्री का संवाद इन दिनों चर्चा का विषय है। प्रवेश के लिए जिद, फिर एबीसीडी और कविता सुनाकर अनाबी ने मुख्यमंत्री का दिल जीत लिया। इसी तरह मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछने पर मिला मासूम उत्तर—और उस पर मुख्यमंत्री की खिलखिलाती हंसी—उनके वात्सल्य भाव को उजागर करती है।
बच्चों के भविष्य पर त्वरित फैसले
बीते दिनों दो वर्षीय अनन्या से संवाद हो या 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट की शिकायत—मुख्यमंत्री ने हर मामले में तत्परता दिखाई। अंजना के मकान पर अवैध कब्जे की शिकायत पर 24 घंटे के भीतर न केवल कब्जा मुक्त कराया गया, बल्कि आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी भी सुनिश्चित कराई गई। यह बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के प्रति मुख्यमंत्री की गंभीरता को रेखांकित करता है।
कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता का अकेले पैदल लखनऊ पहुंचना और मुख्यमंत्री से मिलना—उसके चित्र स्वीकार करना और सुरक्षित-शिक्षित भविष्य का आश्वासन देना—‘प्रदेश ही परिवार’ की अवधारणा को जीवंत करता है।
‘जनता दर्शन’ के माध्यम से लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित कराना, पंखुड़ी की फीस माफ कराना और वाची की पढ़ाई शुरू कराना—ये सभी निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता का प्रमाण हैं।
गणतंत्र दिवस पर बच्चों का स्नेह
26 जनवरी की परेड में बच्चे सीधे मुख्यमंत्री के पास पहुंचे, फोटो खिंचवाई, बातचीत की—एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर मुख्यमंत्री ने अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया।
दर्द देखकर तुरंत इलाज
बीते सितंबर ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे को लेकर पहुंचीं। मुख्यमंत्री उनकी पीड़ा से द्रवित हुए और बेटे को एंबुलेंस से कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान भेजकर तत्काल इलाज शुरू कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों से जुड़ाव, शिक्षा-स्वास्थ्य-सुरक्षा पर त्वरित निर्णय और मानवीय संवेदना—सुशासन की वही तस्वीर है, जिसमें कठोरता के साथ करुणा भी समान रूप से मौजूद|

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