लखनऊ। प्रदेश सरकार प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सड़क, सेतु और सीवर परियोजनाओं में थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था लागू करने जा रही है। नियोजन विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के तहत अब इन परियोजनाओं की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाएगी, ताकि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।
प्रस्ताव के अनुसार 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल और सीवर परियोजनाओं का ऑडिट देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान, जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) द्वारा किया जाएगा। वहीं इससे कम लागत वाली परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच अन्य मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों के माध्यम से कराई जाएगी। ऑडिट की लागत परियोजना की कुल लागत के आधार पर तय की जाएगी।
सरकार का मानना है कि थर्ड पार्टी ऑडिट से निर्माण कार्यों में खामियों की समय रहते पहचान हो सकेगी और दोषी एजेंसियों पर जवाबदेही तय की जा सकेगी। इससे घटिया सामग्री के इस्तेमाल, डिजाइन में कमियों और कार्य में देरी जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
गौरतलब है कि भवन निर्माण परियोजनाओं में थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था पहले से लागू है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब इसी मॉडल को सड़क, सेतु और सीवर जैसी बुनियादी परियोजनाओं में लागू करने की तैयारी है। इससे न केवल जनता को बेहतर और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, बल्कि सरकारी धन के सही उपयोग की भी गारंटी होगी।
नियोजन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं में गुणवत्ता के उच्च मानक स्थापित होंगे। थर्ड पार्टी ऑडिट को विकास कार्यों की अनिवार्य प्रक्रिया बनाने से उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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