लखनऊ। प्रदेश तेजी से विकसित हो रही अवसंरचना और स्पष्ट औद्योगिक नीतियों के चलते वैश्विक कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश का आकर्षक केंद्र बनता जा रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यूपी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा। इसी दिशा में प्रदेश में 1000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है, जिससे पांच लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर वे इकाइयां होती हैं, जहां विदेशी कंपनियां अपने अहम कार्य बाहरी वेंडर के बजाय सीधे अपने कर्मचारियों के माध्यम से कराती हैं। उत्तर प्रदेश में लागू की गई जीसीसी नीति-2024 के जरिए योगी सरकार ने नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जिससे वैश्विक निवेशकों की सबसे बड़ी चिंताएं दूर हुई हैं। पहले नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी निवेश के रास्ते में बाधा मानी जाती थी, लेकिन अब स्पष्ट ढांचा तैयार होने से निवेशकों को शुरुआत से ही नियम, शर्तें और दायित्व समझ में आ रहे हैं। इससे भरोसे का माहौल बना है और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई है। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 90 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर सक्रिय हैं।
राज्य सरकार स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दे रही है। भूमि आधारित प्रोत्साहनों के जरिए निवेश की शुरुआती लागत को कम किया जा रहा है, ताकि निवेशक लंबे समय तक प्रदेश से जुड़े रहें। अस्थायी कार्यालयों या किराये की व्यवस्था के बजाय स्थायी औद्योगिक संरचना पर जोर दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य मजबूत और टिकाऊ बन सके। इसके साथ ही सरकार केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है, ताकि योजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी हों।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के माध्यम से प्रदेश में उच्च मूल्य वाले रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिल रहा है। इससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी और प्रतिभा पलायन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। साथ ही, कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन इलाकों में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगी, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।




