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Tuesday, January 13, 2026

ईरान में भड़की हिंसा से दुनिया में चिंता, ट्रम्प की चेतावनी से बढ़ा टकराव का खतरा

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तेहरान / वॉशिंगटन: ईरान (Iran)में जारी सरकार-विरोधी आंदोलनों ने अब अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले लिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वहां की सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए “रेड लाइन” पार कर रही है। ट्रम्प के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों के साथ जो हो रहा है, उस पर अमेरिका लगातार नजर रखे हुए है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने सचमुच रेड लाइन पार कर ली है, तो उन्होंने कहा कि हालात उसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान अमेरिका से बातचीत करना चाहता है और संपर्क में है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को पहले ठोस और निर्णायक कदम उठाने पड़ सकते हैं।

ईरान में बीते करीब दो सप्ताह से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हैं। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, 10 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

प्रदर्शनों के दौरान कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे पूरे-के-पूरे इलाके अंधेरे में डूब गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर नारे लगाते नजर आए। कई स्थानों पर सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और कुछ धार्मिक स्थलों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं।

ईरान का सख्त रुख, अमेरिका और इजराइल को खुली चेतावनी

अमेरिकी बयानबाजी पर ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे, युद्धपोत और इजराइल ईरान के निशाने पर होंगे। संसद सत्र के दौरान ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे भी लगाए गए।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को मारने और जिंदा जलाने जैसी घटनाएं की हैं। उन्होंने इन घटनाओं के पीछे इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद की साजिश होने का दावा किया और इससे जुड़े वीडियो भी साझा किए।

अमेरिका में भी गूंजा ईरान का मुद्दा

ईरान के हालात का असर अमेरिका तक पहुंच गया है। लॉस एंजिलिस में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेज रफ्तार ट्रक भीड़ के बीच से गुजर गया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। बाद में प्रदर्शनकारियों ने ट्रक चालक पर हमला करने की कोशिश की। पुलिस ने कुछ ही दूरी पर ट्रक को रोक लिया, हालांकि तब तक वाहन को नुकसान पहुंच चुका था।

ईरान में अशांति के बीच भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की खबरों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं और किसी भी भारतीय नागरिक को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

ट्रम्प को सैन्य विकल्पों की ब्रीफिंग

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर और सख्ती करती है, तो अमेरिका सैन्य कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर सकता है। हालांकि, फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान आजादी की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है।

ईरान में जारी आंदोलन अब केवल विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सत्ता परिवर्तन की मांग भी तेज हो गई है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सत्ता से हटे शाह के बेटे रजा पहलवी को देश की बागडोर सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

65 वर्षीय रजा पहलवी पिछले लगभग 50 वर्षों से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। हाल ही में उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि वह राष्ट्रीय आंदोलन की जीत के समय ईरान की जनता के साथ खड़े रहना चाहते हैं।

ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सामाजिक असंतोष से जूझ रहा है। अमेरिका की चेतावनी, संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चाएं और ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस पर टिकी है कि यह संकट कूटनीति और बातचीत से सुलझेगा या फिर पश्चिम एशिया एक और बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।

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