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Thursday, April 2, 2026

महिलाओं ने संभाली गांव की कमान: तराई में ‘श्वेत क्रांति’ से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

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लखनऊ

प्रदेश के तराई क्षेत्रों में महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे ग्रामीण विकास मॉडल को नई दिशा दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते अब गांवों में महिलाएं केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक गतिविधियों की धुरी बन चुकी हैं। ‘श्वेत क्रांति’ के रूप में सामने आया यह परिवर्तन न केवल महिलाओं की जिंदगी बदल रहा है, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज को समृद्धि की ओर अग्रसर कर रहा है।
तराई के छह प्रमुख जिलों में ‘सृजनी महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ (MPCL) के माध्यम से लगभग 51 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़कर संगठित रूप से दुग्ध उत्पादन, संग्रहण और विपणन का कार्य कर रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को एक मंच प्रदान कर रही है, जहां वे न केवल उत्पादन करती हैं, बल्कि अपने उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए बाजार तक सीधी पहुंच भी बना रही हैं। इस संगठित प्रयास का ही परिणाम है कि आज इन क्षेत्रों से प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक दूध का संकलन किया जा रहा है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें महिलाओं की भूमिका केवल श्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे निर्णय लेने से लेकर प्रबंधन और वित्तीय संचालन तक हर स्तर पर सक्रिय हैं। उन्होंने डेयरी व्यवसाय को आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के साथ जोड़कर इसे एक सफल उद्यम में बदल दिया है। अब तक इन महिला समूहों द्वारा करीब ढाई सौ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है, जो इस पहल की आर्थिक सफलता को दर्शाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले रोजगार के सीमित साधन थे और पुरुषों का पलायन आम बात थी, वहीं अब गांवों में ही रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे उनके परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण स्तर में भी सुधार आया है। इसके साथ ही महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हुई है।
सरकार की इस पहल ने महिलाओं में आत्मविश्वास का संचार किया है और उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयास की ताकत को पहचान रही हैं, जो उन्हें और अधिक सशक्त बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तराई क्षेत्र में लागू यह मॉडल पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श बन सकता है। यदि इसी प्रकार महिलाओं को संगठित कर उन्हें संसाधन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
आने वाले समय में यह ‘श्वेत क्रांति’ न केवल दूध उत्पादन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी, बल्कि यह महिलाओं के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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