फर्रुखाबाद। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर पूर्व विधायक एवं 1972 से वर्तमान तक महिला हित के संघर्ष में संलग्न श्रीमती उर्मिला राजपूत ने महिला समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और अपने कर्तव्यों का निर्वाह पूरी तरह से करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि सामाजिक और धार्मिक ठेकेदारों ने नारी को दोयम दर्जे का नागरिक मानकर उनकों न तो समान अवसर प्रदान किये और न ही उनकी प्रतिमा और योग्यता को विकसित करने की सुविधायें दी।सतीप्रथा, बाल विवाह पर रोक के साथ विधवा-विवाह, नारी शिक्षा, नौकरी प्राप्त करने, ससुराल और मायके में सम्पत्ति में अधिकार आदि के कानून बनाने जैसे अधिकारों के लिए संघर्ष महिला समाज ने किया।
अमेरिका के न्यूयार्क में महिलाओं ने आंदोलन किया था इसके बाद संघर्ष चलता रहा और 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने का निर्णय लिया गया उन्होंने बताया कि उन्होंने 1972 से लेकर अभी तक किसी रूप में है हर बार से महिला दिवस मनाकर महिलाओं के उत्थान के लिए संघर्ष किया है और आगे भी करती रहेंगी।
उन्होंने कहा कि यूरोप के देशों में स्त्री शिक्षा के प्रचार से अनेक सकारात्मक घटनाओं ने पूरे विश्व की महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किये। जापान की जुनको ताबेई ने एवरेस्ट चोटी पर चढ़कर सफलता के झण्डे गाडे। रूस की वेलेन्तीना तेरेश्कोवा ने प्रथम बार अन्तरिक्ष की यात्रा की, श्रीलंका की श्रीमावो भण्डारनायके ने प्रथम बार किसी देश की निवार्चित प्रधानमंत्री बनकर विश्व में कीर्तिमान, राजनीतिज्ञों में भी बनाया।
ऐसी कई घटनाओं ने महिलाओं को आगे बढ़ने वो मार्ग खोले। उसकी परिणिति है कि विद्यालयी परीक्षाफलों में छात्रायें हमेशा ही आगे रहती है और नौकरी की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भी बालिकायें शीर्षस्थ पद प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में उनके द्वारा श्रीमती गीता शाक्य, कु० सुषमा कटियार , श्रीमती शशि हजेला मृदुला पाण्डे आदि के सहयोग से 1972 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मनाना प्रारम्भ किया गया था।


