1.65 लाख की ठगी में साइबर सेल ने 1.02 लाख रुपये कराए वापस; सतर्कता से बची बड़ी रकम
मैनपुरी
दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव उझैया में एक महिला ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई, जहां शातिर ठग ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर खाते से 1.65 लाख रुपये पार कर दिए। हालांकि पीड़िता की तत्परता और साइबर सेल की सक्रियता के चलते बड़ी राहत मिली और ठगी गई रकम में से 1.02 लाख रुपये वापस खाते में जमा करा दिए गए। इस कार्रवाई से पीड़ित महिला ने राहत की सांस ली है, वहीं यह मामला लोगों के लिए सतर्क रहने की सीख भी दे रहा है।
गांव उझैया निवासी डिंपल ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खाते की केवाईसी अपडेट करनी है, अन्यथा खाता बंद हो सकता है। बातों में उलझाकर ठग ने उनसे खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी जैसे ओटीपी और अन्य डिटेल हासिल कर ली। कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर लगातार मैसेज आने लगे, जिनमें खाते से कुल 1.65 लाख रुपये निकलने की सूचना थी। यह देख डिंपल के होश उड़ गए और वह घबरा गईं।
घटना के तुरंत बाद उन्होंने सूझबूझ का परिचय देते हुए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई और साइबर थाने में लिखित प्रार्थनापत्र भी दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और संदिग्ध ट्रांजेक्शन को ट्रैक करते हुए ठगी गई धनराशि में से 1,01,998 रुपये को होल्ड कराने में सफलता हासिल की।
पीड़िता को साइबर थाने बुलाया गया, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद होल्ड की गई धनराशि उसके खाते में वापस करा दी गई। इस त्वरित कार्रवाई से महिला को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी जैसे ओटीपी, एटीएम पिन या खाता नंबर साझा न करें। साथ ही, यदि इस प्रकार की कोई घटना होती है तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि समय रहते की गई कार्रवाई से ठगी गई रकम को वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।


