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Friday, January 30, 2026

कड़ाके की सर्दी में यूक्रेन पर हमले रुकेंगे या नहीं? ट्रंप के दावे पर जेलेंस्की को संदेह

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यूक्रेन और रूस के बीच बीते चार वर्षों से जारी भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन के कीव समेत कई इलाकों में आम लोग कड़ाके की सर्दी से जूझ रहे हैं। इसी बीच यह सवाल अहम हो गया है कि क्या रूस वास्तव में अपने कथित वादे पर अमल करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि रूस ने एक सप्ताह तक यूक्रेन के बिजली घरों और बिजली आपूर्ति से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमति जताई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अत्यधिक ठंड के इस दौर में कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों को निशाना न बनाने का आश्वासन दिया है। ट्रंप के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब सर्द मौसम ने आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं और ऊर्जा आपूर्ति जीवन रेखा बन चुकी है।

हालांकि ट्रंप के इस दावे को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने यह नहीं बताया कि पुतिन से यह बातचीत कब हुई और यह कथित रोक कब से और कितने समय तक लागू रहेगी। व्हाइट हाउस से जब इस विषय पर सवाल किए गए तो वहां से भी कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। वहीं, क्रेमलिन की ओर से भी इस बात की तत्काल पुष्टि नहीं हुई कि रूस ने हमले रोकने को लेकर कोई औपचारिक प्रतिबद्धता की है।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ट्रंप के दावे पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि रूस की नीयत पर भरोसा करना मुश्किल है। जेलेंस्की ने साफ कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रूस वास्तव में युद्ध समाप्त करना चाहता है। उन्होंने याद दिलाया कि रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया था और अब उस युद्ध को चार साल पूरे होने वाले हैं।

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिका और अन्य देशों की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद रूस की ओर से शांति समझौते के कोई ठोस संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। उनके अनुसार, रूस लगातार सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना इसी रणनीति का हिस्सा रहा है।

हालांकि यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रूस वास्तव में यूक्रेन के बिजली घरों और अन्य ऊर्जा परिसंपत्तियों पर हमले रोक देता है, तो यूक्रेन भी जवाबी कदम उठाने को तैयार है। जेलेंस्की ने कहा कि ऐसी स्थिति में यूक्रेन रूस के ऊर्जा ढांचे, विशेषकर तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर विचार कर सकता है।

यूक्रेन पहले ही गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। हाल के महीनों में रूसी हमलों के कारण कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली कटौती झेलनी पड़ी है। ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान से अस्पतालों, हीटिंग सिस्टम और आम नागरिकों की दैनिक जरूरतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए मौसम विभाग और यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है। कुछ इलाकों में तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना जताई गई है। ऐसे में बिजली और हीटिंग की निर्बाध आपूर्ति यूक्रेन के लिए जीवन-मरण का सवाल बन गई है।

इन परिस्थितियों में दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूस वास्तव में हमले रोकता है या यह केवल कूटनीतिक बयानबाजी साबित होती है। कड़ाके की सर्दी, युद्ध की थकान और अनिश्चित भविष्य के बीच यूक्रेन के नागरिक फिलहाल शांति से ज्यादा भरोसेमंद बिजली और गर्मी की उम्मीद कर रहे हैं।

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