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Friday, January 30, 2026

विधायक में कैबिनेट मंत्री का रास्ता रोकने की ताकत आखिर आई कहां से?

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– क्या यह सिर्फ जनप्रतिनिधि का आक्रोश है या किसी ‘ऊपरी शह’ का संकेत?

उरई/महोबा: महोबा में जल संसाधन मंत्री (Water Resources Minister) स्वतंत्र देव सिंह (Swatantra Dev Singh) का रास्ता रोककर विरोध दर्ज कराना कोई साधारण घटना नहीं थी। यह सवाल अब पूरे राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है कि एक विधायक में इतना आत्मविश्वास और साहस आखिर आया कहां से?यह घटना केवल जल जीवन मिशन की बदहाली तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि इसके तार भाजपा के भीतर चल रही दिल्ली बनाम लखनऊ की खींचतान से भी जुड़ते नज़र आ रहे हैं। एक दौर था जब चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत के पिता गंगा चरण राजपूत छात्र राजनीति में सत्ता से सीधे टकराने के लिए जाने जाते थे।

1986 में उरई के सर्किट हाउस में डीआईजी के हाथ से माइक छीन लेना आज भी राजनीतिक किस्सों में दर्ज है।आज, दशकों बाद, वही तेवर उनके पुत्र में नज़र आए—भीड़, समर्थक, आक्रोश और सीधा सत्ता से सवाल। कभी पूर्व मंत्री बाबूराम एमकॉम के दौर में हाशिए पर रहे स्वतंत्र देव सिंह ने संगठन में ज़मीन से मेहनत कर पहचान बनाई।

अमित शाह की नज़रों में आए, रैलियों की ज़िम्मेदारी संभाली और फिर धीरे-धीरे सत्ता के केंद्र तक पहुंचे।बाद के वर्षों में वे योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी माने जाने लगे—यहां तक कि उन्हें मुख्यमंत्री की “परछाईं” कहा जाने लगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 2017 से ही योगी और दिल्ली नेतृत्व के बीच मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं।हालांकि सार्वजनिक मंचों पर एकता दिखाई जाती है, लेकिन निर्णय लेने की स्वतंत्रता और हिंदुत्व के नेतृत्व को लेकर खींचतान जारी है।

आज की तारीख में योगी देश में हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं—और यही बात दिल्ली की रणनीति में असहजता पैदा करती है।तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में योगी, प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा सकते हैं—यही समीकरण कई सियासी चालों की वजह बन रहा है। विधायक गुड्डू राजपूत ने बेहद चतुराई से अपने विरोध को नरेंद्र मोदी की हर घर जल योजना से जोड़ दिया।

उनका सीधा सवाल था चार साल से पत्र लिखे जा रहे हैं, सड़कें खुदी हैं, नल सूखे हैं, पानी सिर्फ कागजों में बह रहा है—तो क्या जनता की लड़ाई लड़ना गुनाह है?प्रधानमंत्री की योजना को ढाल बनाकर विधायक ने खुद को राजनीतिक कार्रवाई से लगभग सुरक्षित कर लिया। महोबा में हालात ऐसे बने कि समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई।

मंत्री को भीड़ में घिरकर विधायक के साथ खड़े होकर आश्वासन देना पड़ा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, गांवों में निरीक्षण, सुधार की बातें।लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह रही कि मंत्री किसी गांव में जाकर हकीकत देखने का साहस नहीं जुटा पाए।

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