– रोजगार महाकुंभ में आए 1 लाख अभ्यर्थी
– नौकरी नहीं, परेशानी मिली
लखनऊ: इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में आयोजित रोजगार महाकुंभ (Employment Mahakumbh) के पहले दिन अव्यवस्थाओं का अंबार देखने को मिला। सोशल मीडिया और समाचार चैनलों के प्रचार को देखकर प्रदेशभर से करीब एक लाख युवा राजधानी पहुंचे, लेकिन उन्हें उम्मीदों के बजाय परेशानी और अव्यवस्था (no arrangement) का सामना करना पड़ा। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए इस आयोजन में मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव नजर आया।
अयोध्या से आए अभ्यर्थियों ने बताया कि वॉशरूम की स्थिति बेहद खराब थी। टॉयलेट की संख्या कम थी और जो मौजूद थे, वे भी गंदगी से भरे हुए थे। उन्हें वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए एक घंटे तक लाइन में लगना पड़ा। पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी पर्याप्त नहीं थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि वह इंटरव्यू देने आए थे, लेकिन इंटरव्यू तक नहीं हो सका।
पुलिसकर्मी बार-बार उन्हें अलग-अलग दिशा में भेजते रहे और उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। पहले दिन हजारों युवाओं को अलग-अलग काउंटरों के चक्कर लगाने पड़े। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। लेकिन पूरा जोर सिर्फ भीड़ को काबू करने और युवाओं को गेट से हटाने पर रहा। जिन युवाओं को नौकरी की उम्मीद थी, वे घंटों लाइन में लगने, कागज़ जमा करने की कोशिश करने और बार-बार दिशा बदलने में ही उलझे रहे।
कई युवाओं ने बताया कि उनका सीवी जमा ही नहीं हो सका और जिन्होंने जमा किया, उनके दस्तावेज जमीन पर पड़े रहे, जिन्हें देखने वाला तक नहीं था। कई युवाओं ने हताश होकर गेट फांदकर परिसर से बाहर निकलते हुए भी देखा गया। महाकुंभ के नाम पर आए इन युवाओं को व्यवस्था की कमी, अनदेखी और भ्रम की स्थिति के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। अब सवाल उठ रहा है कि जब इतनी भीड़ और आयोजन की तैयारी नहीं थी, तो ऐसे आयोजन को इस स्तर पर प्रचारित क्यों किया गया?